भोपाल
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्र पुनर्निर्माण के महायज्ञ में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और हमारा मुख्य केंद्रबिंदु विद्यार्थी है, इसलिए उच्च शिक्षा में होने वाला प्रत्येक परिवर्तन विद्यार्थी के सर्वांगीण हित और विकास को ध्यान में रखकर होना चाहिए। शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, व्यक्तित्व, संस्कार, नैतिक मूल्यों और जीवन-दृष्टि के निर्माण का माध्यम है। विद्यार्थियों को रोजगार एवं कौशल के लिए सक्षम बनाने के साथ उनमें मानवीय संवेदनाएं, नैतिक मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करना भी आवश्यक है। हमारा ध्येय केवल रोजगार प्राप्त करने वाली पीढ़ी तैयार करना नहीं, बल्कि ज्ञानवान, कुशल, संवेदनशील, चरित्रवान और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने वाले श्रेष्ठ नागरिकों का निर्माण करना होना चाहिए।
मंत्री परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में अग्रणी राज्यों में रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति करोड़ों शिक्षाविदों की सहभागिता, व्यापक विचार-विमर्श और अनुभवों से निर्मित हुई है। इसी सहभागी भावना के साथ मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा में ‘मिशन कर्मयोगी बनें’ की भावना को समाहित करते हुए देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा में क्षमता निर्माण के लिए तैयार किए जा रहे व्यापक ढांचे को प्रभावी, व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाने में प्राध्यापकों, शिक्षाविदों और शिक्षा जगत की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उनके अनुभव, कार्यक्षेत्र की वास्तविक चुनौतियां और सुझाव उच्च शिक्षा व्यवस्था को चुनौतियों से समाधान की दिशा में ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उच्च शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में उत्तरदायित्व और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है, क्योंकि बेहतर कार्यसंस्कृति और उत्कृष्ट परिणाम तभी संभव हैं, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा, दक्षता और संवेदनशीलता के साथ करे। आज की कार्यशाला में महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित प्रश्नों के माध्यम से प्राप्त सुझाव निश्चित रूप से क्षमता निर्माण की भावी रूपरेखा तैयार करने में सहायक सिद्ध होंगे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मिशन कर्मयोगी’ के उद्देश्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। कर्मयोगी की भावना केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि निरंतर सीखने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने, नवाचार करने, उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने और श्रेष्ठ परिणाम देने की प्रतिबद्धता है। मंत्री परमार मंत्रालय में ‘कर्मयोगी बनें’ के अंतर्गत क्षमता निर्माण योजना पर आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री परमार ने कहा कि ज्ञान आधारित शिक्षा के माध्यम से भारत को वर्ष 2047 तक विकसित, समर्थ और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के संकल्प को गति दी जा सकती है। भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए शिक्षा को ज्ञान, कौशल, रोजगार, अनुसंधान और नवाचार के साथ नैतिकता, संस्कार, संवेदना और राष्ट्रबोध से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सुझावों और अनुभवों से तैयार होने वाला यह क्षमता निर्माण ढांचा प्रदेश की उच्च शिक्षा को अधिक दक्ष, उत्तरदायी, संवेदनशील, विद्यार्थी-केंद्रित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का सशक्त आधार बनेगा।
व्यापक सहभागिता से तैयार होगी भविष्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था
प्रदेश में ‘कर्मयोगी शिक्षक’ के लिए क्षमता निर्माण का व्यापक ढांचा तैयार करने के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापकों और अधिकारियों से व्यापक सुझाव एवं अभिमत प्राप्त किए जा रहे हैं। इसमें कुलगुरु, कुलसचिव, प्राचार्य, प्रभारी प्राचार्य, प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी एवं अतिथि विद्वानों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।
अभिमत प्रक्रिया में शिक्षण, अनुसंधान, प्रशासन, तकनीकी एवं डिजिटल दक्षता, व्यवहारगत क्षमताओं, कार्यभार, कार्य-समय तथा कार्यक्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों से जुड़े विषयों पर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटल एवं मिश्रित शिक्षा, कौशल आधारित शिक्षा तथा बहुविषयक शिक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए आवश्यक दक्षताओं को भी क्षमता निर्माण के ढांचे में सम्मिलित किया जा रहा है।
यह सहभागी प्रक्रिया शिक्षकों एवं अधिकारियों की वास्तविक आवश्यकताओं और अनुभवों को नीति निर्माण से जोड़ते हुए उच्च शिक्षा के लिए अधिक व्यावहारिक, आवश्यकता-आधारित और भविष्य-केंद्रित व्यवस्था विकसित करने में सहायक होगी।
बैठक का संचालन यूनाइटेड कॉन्शसनेस के वैश्विक संयोजक एवं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षाविद् डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने किया। आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने बैठक के प्रारंभ में क्षमता निर्माण के व्यापक ढांचे की आवश्यकता, उद्देश्य एवं प्रस्तावित कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, उच्च शिक्षा डॉ. दिनेश दवे ने आभार व्यक्त किया। बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्रभारी प्राचार्य, प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी एवं अतिथि विद्वानों की वर्चुअल सहभागिता रही।







