पंजाब में रावी का बदलता बहाव बढ़ा सकता है बॉर्डर पर खतरा, अमित शाह को 7 सुझाव

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चंडीगढ़
 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से शुरू की गई प्रहार (पीआरएएचएएआर) राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति और रणनीति को पंजाब की सीमा पर जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत है। पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर रावी दरिया से लगती सीमा की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ सीमा क्षेत्र के गांवों की समस्याओं को दूर करने के लिए सात सुझाव दिए हैं।

उन्होंने पत्र की प्रति पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी भेजी है। सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है, लेकिन इसका असर सीमा के अंतिम छोर तक पहुंचना जरूरी है।

उन्होंने अपने सुझावों को प्रहार के सात स्तंभों से जोड़ते हुए पंजाब की सीमा की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर उपाय करने की बात कही है। सिद्धू पंजाब में बतौर बटाला के जिला मजिस्ट्रेट, अमृतसर के उपायुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

रावी नदी के बदलते बहाव से सुरक्षा चुनौती
सिद्धू ने रावी दरिया के नदी क्षेत्र को विशेष चुनौती बताते हुए कहा कि नदी लगभग हर मानसून में अपना रास्ता बदलती है। ऐसे में नदी के बीच बाड़ लगाना संभव नहीं है। उन्होंने ब्रह्मपुत्र में इस्तेमाल हो रहे व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन सिस्टम को रवि और सतलुज के नदी वाले हिस्सों तक विस्तार देने का सुझाव दिया।

उनके अनुसार बाढ़ से निपटने के लिए बाड़ की डिजाइन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब के सिंचाई विभाग को मिलकर तैयार करनी चाहिए। वर्ष 2025 की बाढ़ में गुरदासपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में सीमा चौकियों और बाड़ को नुकसान पहुंचने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

ड्रोन से नशे की तस्करी पर तकनीकी निगरानी
सिद्धू ने सीमा पर ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए कई स्तर वाली काउंटर-ड्रोन व्यवस्था बनाने की मांग की है। ड्रोन से बरामद सामान के आंकड़ों के आधार पर एआई की मदद से संभावित ड्रॉप जोन की पहचान करने और जिला पुलिस व प्रशासन से मिलने वाली सूचनाओं को राष्ट्रीय खुफिया सूचना तंत्र से जोड़ने का सुझाव दिया है।

उन्होंने सीमा जिलों में नशे और आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें और नजदीक फोरेंसिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की बात कही। साथ ही नशामुक्ति, पुनर्वास और सीमा क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार को भी राष्ट्रीय नशा विरोधी अभियान में पर्याप्त महत्व देने का सुझाव दिया।

मकौड़ा पत्तन पर स्थायी पुल की मांग
सीमा क्षेत्र के गांवों की समस्याओं को उठाते हुए सिद्धू ने गुरदासपुर के मकौड़ा पत्तन पर स्थायी पुल बनाने की मांग की है। फिलहाल रवि पार बसे गांवों के लोग मौसमी पोंटून पुल पर निर्भर हैं। उन्होंने बाड़ के पार खेती करने वाले किसानों के लिए उचित गेट टाइमिंग और मुआवजे की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

सीमा ब्लाकों में शिक्षकों, डाक्टरों और राजस्व कर्मचारियों के लिए कठिन क्षेत्र प्रोत्साहन तथा सीमा गांवों से अधिक संख्या में बॉर्डर विंग होम गार्ड भर्ती करने की भी मांग की गई है। उन्होंने उपायुक्त और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को भी प्रहार रणनीति का प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया।

सिद्धू ने कहा कि हर गिराए गए ड्रोन का पूरा दस्तावेज तैयार किया जाना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के पक्ष में इसका इस्तेमाल हो सके। उन्होंने करतारपुर गलियारे को मानवीय संपर्क का माध्यम बनाए रखने की बात भी कही।

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