शारदीय नवरात्र में इस बार महाष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन है. खासकर उन लोगों के बीच जो अष्टमी का व्रत रखते हैं या फिर नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करते हैं।
कई परिवारों में अष्टमी की पूजा की परंपरा है, तो कई घरों में नवमी की पूजा प्रमुख रूप से की जाती है. ऐसे में सवाल है कि इस बार अष्टमी का व्रत और पूजन किस दिन करना चाहिए? महानवमी की पूजा कब होगी? कन्या पूजन किस दिन करना शुभ रहेगा? और संधि पूजा का मुहूर्त क्या है? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी. आइए पंडित प्रवीण मिश्र जी से जानते हैं कि महा अष्टमी और महा नवमी की तिथि के बारे में।
19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी की पूजा
इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी. इसलिए जिन लोगों के यहां अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं।
अगर आप अष्टमी का व्रत रखते हैं तो 19 अक्टूबर को व्रत रखें और विधि-विधान से मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करें।
कन्या पूजन या कन्या भोजन कराने वाले लोग भी 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान यह अनुष्ठान कर सकते हैं. कोशिश करें कि अष्टमी से जुड़े पूजा-पाठ और कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लिया जाए।
रात में अष्टमी पूजा की परंपरा है तो क्या करें?
कुछ परिवारों में महाष्टमी की पूजा रात्रि में करने की परंपरा होती है. खासकर कुछ परिवारों में कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात के समय की जाती है. ऐसे परिवार 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि लगने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
महानवमी की पूजा कब होगी?
19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी. इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है।
अगर आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, तो आप 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद कन्या पूजन और हवन कर सकते हैं।
यानी 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है।
20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं नवमी का कन्या पूजन
कुछ लोग उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं. ऐसे लोग 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं. हालांकि, इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी. इसलिए 20 अक्टूबर को नवमी के अनुसार पूजा, हवन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर 12:50 बजे से पहले यह अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए. इस तरह, जो लोग उदया तिथि को मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं।
महानवमी का व्रत कब रखें और पारण कब करें?
जिन लोगों के यहां महानवमी का व्रत रखने की परंपरा है, वे नवमी के दिन यानी 19 अक्टूबर को व्रत रख सकते हैं. नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करें और पूरे दिन व्रत रखें. व्रत का पारण अगले दिन यानी विजयादशमी के दिन करना उचित माना जाता है।
संधि पूजा का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा. यह कुल 48 मिनट का समय होगा. अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर कुल 48 मिनट का यह समय संधि काल कहलाता है. इसी दौरान संधि पूजा की जाती है।
शास्त्रों में संधि काल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया था. इसी वजह से संधि पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है. मान्यता है कि इस विशेष समय में मां चामुंडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी को कमल पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।







