लखनऊ
योगी सरकार उत्तर प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर सुशासन को नई गति दे रही है। इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले अग्रणी विभागों में शामिल हो रहा है। विभाग ने शिक्षा क्षेत्र से इसकी शुरुआत की है और अब पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में भी एआई के उपयोग की तैयारी की जा रही है। उद्देश्य है कि तकनीक के जरिए योजनाओं की निगरानी और लाभार्थियों से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनें।
सर्वोदय विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षा को बढ़ावा
समाज कल्याण विभाग ने एआई आधारित तकनीकों की शुरुआत जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों से की है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल सामग्री, 3डी वीडियो और एआई आधारित लैंग्वेज लर्निंग लैब के जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। एडोब एजुकेशन इंडिया पहल के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों को एडोब डिजिटल अकादमी के माध्यम से डिजिटल क्रिएटिविटी और एआई कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थी डिजिटल स्टोरीटेलिंग, रचनात्मक समस्या-समाधान और एआई-सहायित कंटेंट निर्माण जैसे भविष्य के उपयोगी कौशल सीख रहे हैं।
पेंशन में एआई से प्रमाण पत्र सत्यापन
वृद्धावस्था पेंशन और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में एआई आधारित प्रमाण पत्र सत्यापन के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इससे प्रमाण पत्रों की जांच प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने में मदद मिलेगी। तकनीक आधारित सत्यापन से पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
छात्रवृत्ति की निगरानी होगी और मजबूत
छात्रवृत्ति योजना में आवेदन और लाभ वितरण से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण के लिए भी एआई के इस्तेमाल की तैयारी है। डेटा विश्लेषण के जरिए योजना की मॉनिटरिंग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे योजना के क्रियान्वयन की स्थिति का बेहतर आकलन और आवश्यक सुधार संभव होगा।
छात्रावासों में भी एआई प्रशिक्षण की तैयारी
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग, डेटा विश्लेषण और प्रमाण पत्रों के सत्यापन में कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद मिलेगी। राजकीय छात्रावासों में विद्यार्थियों को एआई और पाठ्यक्रम आधारित प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जाएगा।







