गुरु बृहस्पति का पुष्य नक्षत्र गोचर: 4 राशियों के लिए खुला तरक्की का द्वार

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ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति का गोचर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. 18 जून 2026 को गुरु बृहस्पति ने नक्षत्रों के राजा पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर लिया है, जहां वे 18 अगस्त 2026 तक रहेंगे. यह खगोलीय घटना किसी सामान्य गोचर से कहीं अधिक शक्तिशाली है, क्योंकि यह अगले 61 दिनों तक एक विशेष प्रभाव बनाए रखेगी.

गुरु का पुष्य नक्षत्र में आना ज्ञान, धन, संतान और भाग्य के मामलों में बड़े बदलाव का संकेत है. जब गुरु की शुभता पुष्य नक्षत्र की ऊर्जा से जुड़ती है, तो यह समय नए कार्यों की शुरुआत, संपत्ति की खरीद और बड़े निवेश के लिए बेहद फायदेमंद हो जाता है.

इन 4 राशियों के लिए खुलेगा तरक्की का द्वार
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, गुरु का यह गोचर विशेष रूप से 4 राशियों के लिए स्वर्णिम अवसर लेकर आया है.

मेष राशि: आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा और लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होंगे. आर्थिक स्थिति में भी मजबूती आएगी.

कर्क राशि: पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि है, गुरु का इस राशि में गोचर आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है.  निवेश और व्यक्तिगत विकास के लिए यह समय बेहतरीन रहने वाला है.

तुला राशि: अचानक धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं. पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है.  करियर में लंबे समय बाद स्थिरता आएगी.

गुरु की कृपा पाने के लिए अचूक उपाय
गुरु पुष्य नक्षत्र की इस विशेष अवधि का पूर्ण लाभ उठाने के लिए आप  उपाय अपना सकते हैं:

पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार के दिन चने की दाल या पीली मिठाई का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है.

मंत्र जाप: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.  

विष्णु आराधना: पुष्य नक्षत्र के दौरान भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ गुरु के शुभ प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है.

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