हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को किया रद्द, उम्रकैद की सजा काट रही महिला को किया बरी

भुवनेश्वर
 पति की हत्या के आरोप में 12 साल से जेल में बंद पत्नी को ओडिशा हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। महिला को निचली अदालत ने पति की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसलो को न्याय का दुरुपयोग बताते हुए फैसला पलटा दिया है। हाईकोर्ट ने 64 साल की हो चुकी महिला को बरी कर दिया है। साथ ही निचली अदालत को उसले फैसले पर फटकार भी लगाई है।

बता दें कि सुनिता मुंडारी नामक यह महिला 64 साल की हो चुकी हैं। आरोपी पक्ष के अनुसार 28 नवंबर, 2011 को सुंदरगढ़ के झिरपानी गांव में सुनीता ने अपने पति मंगल पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। राउरकेला की एक सत्र अदालत ने 20 दिसंबर, 2014 को उसे दोषी ठहराया था। सुनीता ने उसी साल हाईकोरट में में अपील की थी। गुरुवार को जस्टिस एस के साहू और चित्तरंजन दास की HC बेंच ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी सुनीता के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है।

हाई कोर्ट ने निचली अदालत को लगाई फटकार
बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद हालात यह निष्कर्ष निकालने के लिए पूरी कड़ी नहीं जोड़ते कि महिला ने ही अपराध किया था। बेंच ने कहा कि निचली अदालत के फैसले जायज़ नहीं हैं। अपीलकर्ता के पक्ष में मौजूद बातों को नरअंदाज किया गया है और इस तरह यह न्याय का दुरुपयोग है।

महिला की रिहाई के आदेश दिए
हाईकोर्ट ने IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत निचली अदालत द्वारा सुनीता को दी गई सज़ा को रद्द करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया। बेंच ने कहा कि निचली अदालत बिना किसी सीधे सबूत के इस नतीजे पर पहुंच गई थी कि सुनीता ने हत्या की है। बेंच ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित मामलों में हमेशा यह खतरा बना रहता है कि अनुमान या संदेह कानूनी सबूत की जगह ले सकते हैं।