रायपुर
छत्तीसगढ़ में संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को सरल, सुगम और किफायती बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधार आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। सूरजपुर जिले की ग्रामीण क्षेत्र की गृहिणी सुनीता के लिए जमीन की रजिस्ट्री कराना अब पहले से अधिक सुविधाजनक और कम खर्चीला हो गया है। महिला क्रेता के रूप में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलने से उन्हें 3,940 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। वहीं रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की सुविधा से उन्हें अलग से आवेदन करने और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। आर्थिक राहत के साथ समय की बचत ने उनके लिए संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सहज बना दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल और मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट, रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण और डिजिटल सेवाओं का विस्तार इन सुधारों में प्रमुख हैं। इन व्यवस्थाओं का लाभ हितग्राहियों तक किस प्रकार पहुंच रहा है, यह जानने के लिए विभाग द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत नागरिकों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव संकलित किए जा रहे हैं।
रजिस्ट्री में बचे 3,940 रुपये, घरेलू जरूरतों के लिए बनी सहूलियत
सेवा संकल्प अभियान के तहत अपना अनुभव साझा करते हुए सुनीता ने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें महिला क्रेता के लिए निर्धारित पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का लाभ मिला। इससे उनके 3,940 रुपये बच गए। ग्रामीण परिवेश से आने वाली गृहिणी सुनीता के लिए यह राशि महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री में हुई बचत का उपयोग वे अपने परिवार की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में करेंगी।
राज्य शासन द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित पात्र दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने से संपत्ति खरीदने वाली महिलाओं को आर्थिक राहत मिल रही है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहन मिलने के साथ परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हो रहा है।
रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण, राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने से मिली मुक्ति
सुनीता के लिए पंजीयन शुल्क में छूट के साथ स्वतः नामांतरण की सुविधा भी बड़ी राहत साबित हुई। उन्होंने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था और राजस्व कार्यालयों में जाना पड़ता था। अब ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया भी आसान हो गई है। इससे उनके समय और प्रयास दोनों की बचत हुई।
पूर्व व्यवस्था में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने में 90 से 240 दिन तक का समय लग सकता था। नई व्यवस्था के अंतर्गत पंजीयन के बाद राजस्व अभिलेखों में क्रेता का नाम अद्यतन करने की प्रक्रिया को अधिक तेज और व्यवस्थित बनाया गया है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 42 हजार से अधिक स्वतः नामांतरण किए जा चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिली है।
पंजीयन सेवाओं में सुधार से महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को मिल रहा लाभ
वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को बढ़ावा देते हुए नागरिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन भुगतान और स्वतः नामांतरण जैसी सुविधाओं से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया सरल हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को इन सुधारों का लाभ मिल रहा है।
सुनीता ने शासन के प्रति जताया आभार
सुनीता ने कहा कि पंजीयन शुल्क में छूट मिलने से उनके पैसे बचे और स्वतः नामांतरण की सुविधा से समय की भी बचत हुई। अब उन्हें जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से परेशान नहीं होना पड़ा। उन्होंने इन सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
सूरजपुर की सुनीता का अनुभव दर्शाता है कि पंजीयन विभाग के सुधारों का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। रजिस्ट्री में 3,940 रुपये की बचत और स्वतः नामांतरण की सुविधा उनके लिए आर्थिक राहत के साथ शासकीय सेवाओं में सुगमता का उदाहरण बन गई है।








