पटना
बिजली कंपनी के लिए स्मार्ट मीटर एक खुफिया तकनीक की तरह काम कर रहा। इससे उपलब्ध आंकड़े के विश्लेषण से बिजली चोरी और उपभोक्ताओं के व्यवहार से जुड़ी बातें बिल्कुल ही तकनीकी अंदाज में बिजली कंपनी को उपलब्ध हो जा रही। बिजली कंपनी के अनुसार अब तक 10 अरब डाटा प्वाइंट्स जमा हो चुके हैं। इनसे आने वाले समय के लिए रणनीति भी तैयार हो रही।
अगर रात 9 बजे बाद बिजली की खपत कम हो तो पहुंच जाएगी टीम
बिजली कंपनी के संबंधित अधिकारियों का कहना है कि बहुत से मामलों में फर्जीवाड़ा यह होता है कि व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपना बिजली कनेक्शन घरेलू उपभोक्ता के नाम पर ले लेते हैं। यह पूरी तरह से गैरकानूनी है। ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान भी स्मार्ट मीटर के माध्यम से हो रही।
व्यावसायिक कनेक्शन का जो मीटर होता है, उस पर बिजली की खपत शाम छह बजे से रात नौ बजे अधिक होती है। रात नौ बजे के बाद लगभग खत्म हो जाता है। स्मार्ट मीटर से मिले आंकड़े से यह जानकारी मिल जाती है।
घरेलू कनेक्शन में रात नौ बजे के बाद खपत अधिक हो जाती है। रात में खपत कम होने के आंकड़े मिलने के बाद बिजली कंपनी की टीम को यह निर्देश है कि वह संबंधित उपभोक्ता के आवास पर जाकर इसकी जांच करे।
ट्रांसफार्मर पर लगे स्मार्ट मीटर भी खुफिया तंत्र के रूप में
प्राय: हरेक मुहल्ले में जो वितरण ट्रांसफार्मर है उस पर बिजली कंपनी ने स्मार्ट मीटर लगाया हुआ है। स्मार्ट मीटर से कितनी बिजली मुहल्ले में जा रही इसका पूरा ब्योरा उपलब्ध रहता है।
अगर बिलिंग ट्रांसफार्मर से जा रही बिजली से कम होती है तो बिजली कंपनी तुरंत सक्रिय हो जाता है। मुहल्ले के सभी स्मार्ट मीटर का आकलन कर यह देखा जाता है कि कहां से एकदम कम खपत का आंकड़ा है। इसके बाद संबंधित उपभोक्ता के घर जाकर जांच किए जाने का प्राविधान है।
भविष्य के रणनीति भी स्मार्ट मीटर के आंकड़े से तैयार हो रहे
बिहार में अब तक 93 लाख घरेलू उपभाेक्ताओं के घर स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। बिहार मे इस श्रेणी के उपभोक्ताओं की संख्या 2.25 करोड़ के करीब है। बिहार में जितने स्मार्ट मीटर लगे हैं, वह पूरे देश में लगे स्मार्ट मीटर का 70 प्रतिशत है।
स्मार्ट मीटर से मिले आंकड़े यह भी मालूम हो जा रहा कि बिजली की खपत की रफ्तार क्या है और आने वाले समय में यह किस तरह से बढ़ेगी। इस आंकड़े के हिसाब बिजली कंपनी भविष्य में आपूर्ति की रणनीति भी बना रही।








