राजस्थान में OBC सर्वे रिपोर्ट जारी, 7 जातियों की आबादी 55% से ज्यादा

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जयपुर
राजस्थान में आगामी स्थानीय निकायों और पंचायती राज चुनावों से ठीक पहले राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक) प्रतिनिधित्व आयोग की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट सामने आ गई है। रिटायर्ड जस्टिस मदनलाल भाटी की अध्यक्षता वाले आयोग ने प्रदेश की अति पिछड़ा वर्ग-MBC की 5 जातियों सहित 92 ओबीसी जातियों (जिन्में अति पिछड़ा वर्ग-MBC की 5 जातियां भी शामिल हैं) के 74.85 लाख से अधिक परिवारों का गहन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सर्वे किया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पिछडे़ वर्ग की कुल आबादी 3.63 करोड़ से अधिक है। रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि ओबीसी की 92 जातियों में से केवल 7 जातियों की कुल आबादी मिलाकर 55% से अधिक हो जाती है, जबकि शेष 85 जातियां 45% हिस्सेदारी में सिमटी हुई हैं।

आबादी के गणित में कौन आगे?
आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक आबादी के मामले में जाट और जट सिख समाज ओबीसी वर्ग में सबसे बड़े समूह के रूप में उभरा है। दूसरे स्थान पर गुर्जर, तीसरे पर कुम्हार-कुमावत, चौथे पर माली-सैनी, पांचवें पर जांगिड़, छठे पर यादव और सातवें स्थान पर मेव समाज आता है।

ओबीसी जातियों की आबादी का प्रतिशत ब्रेकअप
क्रमांक    जाति/समुदाय            आबादी (प्रतिशत में)
1            जाट और जट सिख           20.14%
2            गुर्जर                                9.11%
3            कुम्हार एवं कुमावत            8.36%
4            माली, सैनी एवं बागवान       7.80%
5           जांगिड़ / सुथार                      3.49%
6            यादव / अहीर                      3.22%
7              मेव                                    3 .02%
कुल      शीर्ष 7 जातियां                      55.14%

सरकारी नौकरियों में 4 जातियों का वर्चस्व
रिपोर्ट के आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि राज्य में कुल 3.92 लाख ओबीसी सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। हालांकि, इन सरकारी नौकरियों में भारी असमानता देखने को मिली है।

78% सरकारी नौकरियां मात्र 4 जातियों में: कुल ओबीसी सरकारी कर्मचारियों में से 78 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ जाट, गुर्जर, सैनी और यादव समाज से आता है।

18 जातियों का खाता तक नहीं खुला: रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि ओबीसी की 18 ऐसी जातियां हैं, जिनके 100 लोग भी सरकारी सेवा में नहीं हैं।

श्रम और स्वरोजगार की स्थिति
राज्य में ओबीसी वर्ग के 12.50 लाख लोग अपना खुद का व्यवसाय (स्वरोजगार) चला रहे हैं। वहीं दैनिक मजदूरी व श्रम क्षेत्र में कुम्हार-कुमावत और सैनी समाज की संख्या सर्वाधिक है।

प्रमुख जातियों में स्वरोजगार का आंकड़ा
कुम्हार-कुमावत: 1.24 लाख लोग

50 हजार से अधिक श्रमिकों वाली प्रमुख जातियां

जाति / समुदाय               श्रमिकों की संख्या (लाख में)
कुम्हार और कुमावत      3.32 लाख
सैनी और बागवान          2.72 लाख
जाट                              2.16 लाख
गुर्जर                            1.80 लाख
रावत                            1.25 लाख
जांगिड़                           1.15 लाख

जेंडर रेशियो: 1000 पुरुषों पर 914 महिलाएं

आयोग के सर्वे में ओबीसी वर्ग के जेंडर डेटा को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है:

पुरुष आबादी: 1,87,50,094 (कुल ओबीसी आबादी का 52.23%)

महिला आबादी: 1,71,05,082 (कुल ओबीसी आबादी का 47.76%)

लिंगानुपात : प्रति 1,000 पुरुषों पर 914 महिलाएं हैं।

राजनीतिक और चुनावी मायने
सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फॉर्मूले के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट का सीधा असर आगामी राजस्थान निकाय और पंचायत चुनाव में वार्डों के आरक्षण पर पड़ेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन जातियों की राजनीतिक व आर्थिक हिस्सेदारी नगण्य रही है, उन्हें प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए विशेष प्रावधान व नीतिगत प्रयास किए जाने जरूरी हैं।

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