पटना
बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की कुल आठ सीटों के चुनाव नतीजों और चल रही मतगणना के रुझान का संक्षेप संदेश है कि आपसी झगड़े में महागठबंधन के घटक कांग्रेस और सीपीआई समेत विपक्ष से जन सुराज पार्टी ने अपनी-अपनी सिटिंग एमएलसी सीटें गंवा दी, जबकि एकजुटता और बगावत पर डंडा चलाकर बीजेपी-जेडीयू के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने लाज बजा ली। जिन 8 सीटों पर चुनाव हुए थे, उनमें मौजूदा एमएलसी के हिसाब से 2 सीट बीजेपी, 1-1 सीट जेडीयू, कांग्रेस, सीपीआई और जन सुराज पार्टी, जबकि 3 सीटें निर्दलीय के पास थी। 6 सीट के नतीजे घोषित हो गए हैं, जबकि बाकी 2 पर आगे चल रहे कैंडिडेट की ही जीत मानकर बात करें तो भाजपा एक सीट के फायदे से 3 पर पहुंच गई है। राजद और जन सुराज पार्टी का खाता खुला है। सीपीआई और कांग्रेस साफ हो गई है। निर्दलीय 1 घटकर 2 पर पहुंच रहे हैं। हालांकि निर्दलीय की दलीय निष्ठा देखें तो पिछली बार के 3 निर्दलीय में 1-1 भाजपा और जन सुराज के थे। इस बार भी जो 2 निर्दलीय जीत रहे हैं, उनमें 1 भाजपा का बागी है।
तालमेल नहीं होने के कारण महागठबंधन को मुंह की खानी पड़ी। नई सीटों पर जीत हासिल करने की बात कौन कहे, घटक दल जीती सीट भी नहीं बचा पाये। कांग्रेस के दिग्गज नेता मदन मोहन झा कई बार से जीत रहे दरभंगा शिक्षक सीट नहीं बचा सके। सीपीआई के संजय सिंह तिरहुत टीचर से हार गए। राजद के संजीव सिंह ने पटना टीचर सीट बीजेपी के नवल किशोर यादव से छीनकर बड़ा उलटफेर किया, क्योंकि यादव लगातार 5 बार से जीत रहे थे। दरभंगा स्नातक सीट पर भी राजद का कैंडिडेट दमदार प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन भाजपा कैंडिडेट सर्वेश कुमार के पीछे है।
चुनाव की घोषणा के साथ ही महागठबंधन में बिखराव दिखने लगा था। राजद ने सहयोगी दलों से बात किए बिना प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। इस पर बिफरी कांग्रेस ने भी राजद प्रत्याशियों के सामने पटना शिक्षक, पटना स्नातक, कोसी स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों से अपने उम्मीदवार उतार दिए। सीपीआई भी दोस्ताना संघर्ष में कूद गई। आठ में से महज दो सीटें ही ऐसी दिखीं, जहां महागठबंधन के दल आपस में नहीं लड़ रहे थे। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जब सफाई दी तो भी यही कहा कि पिछली बार की तरह सभी अलग-अलग लड़ रहे हैं।
एनडीए की रणनीति कारगर दिखी
एनडीए के घटक दलों में शुरू से ही एकता नजर आई और यह परिणामों में भी परिणत हुई। आरंभ में ही तय हो गया कि चुनाव में एनडीए की ओर से जदयू और भाजपा के 4-4 उम्मीदवार लड़ेंगे। हम, लोजपा (आर) और रालोमो ने समर्थन किया और पंचायत, प्रखंड, जिला से राज्य मुख्यालय तक के नेता एकजुट नजर आए। इसने स्नातक और शिक्षक सीटों के मतदान में बड़ा असर डाला। एनडीए दलों के समर्थक वोटरों में कोई बिखराव नहीं हुआ और नतीजा एनडीए की बढ़त के रूप में सामने आया। इस चुनाव को लेकर एनडीए की व्यापक रणनीति भी दिखी। भाजपा और जदयू के दफ्तरों में घटक दलों की कई बैठकें हुईं। हालांकि, जदयू को पटना स्नातक सीट पर अपने ही विधायक अनंत सिंह की बगावत से किरकिरी झेलनी पड़ी।
जेडीयू ने संभाल ली अनंत सिंह की बगावत
पर अंत-अंत तक जदयू ने इस सीट को संभाल लिया। साथ ही, मतदान के बाद अनंत सिंह को दल से निकाल कर अपने समर्थकों के बीच वह संदेश देने में भी कामयाब रहा। वहीं, सारण शिक्षक सीट से रालोमो के रामपुकार सिन्हा चुनाव में कूदे तो दल के तीन विधायकों ने उनका समर्थन कर दिया। लेकिन, दल और गठबंधन के कहने पर रामपुकार ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। यह दीगर है कि तब भी जदयू के आनंद पुष्कर अपने दूसरे प्रयास में भी कामयाब नहीं हो पाए। यह सीट बीजेपी के बागी निर्दलीय राहुल राज ने जीत ली।
जन सुराज पार्टी की विधान परिषद में हुई इंट्री
बांकीपुर विधानसभा उप-चुनाव के बाद एमएलसी इलेक्शन भी जन सुराज के लिए बेहतर नतीजा लेकर आया। पिछली बार सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय जीतकर आए अफाक अहमद पार्टी का सिम्बल लेकर उतरे। हालांकि वे जीत नहीं पाए। लेकिन, जन सुराज ने सभी सीटों पर जीतने वालों को सीधी टक्कर दी या लड़ाई का तीसरा कोना बने। जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने दरभंगा में शिक्षक सीट से दिग्गज कांग्रेसी मदन मोहन झा को हराकर जन सुराज की बिहार विधान परिषद में भी एंट्री करा दी। जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। सुरेश राय की जीत के साथ अब बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में पार्टी के एक-एक सदस्य हो गए हैं, जिसमें एक प्रशांत किशोर ही हैं।







