जीरकपुर/मोहाली.
निवेश योजना में मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर कई राज्यों के लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी में मोहाली के एसएसपी तक पहुंची शिकायतों के बाद जीरकपुर थाने में भरत भूषण के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
पुलिस की जांच में बड़े वित्तीय धोखाधड़ी रैकेट के संकेत मिले हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न शिकायतकर्ताओं से करीब 5 करोड़ 93 लाख रुपये निवेश के नाम पर लिए गए और बाद में राशि वापस नहीं की गई। शिकायतकर्ताओं में जीरकपुर के व्यवसायी हर्षील अरोड़ा, चंडीगढ़ के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेंद्र कुमार नंदल, कुरुक्षेत्र निवासी संजीव गुप्ता, जीरकपुर के प्रॉपर्टी कारोबारी रमेश कुमार और पानीपत निवासी नीरज कुमार शामिल हैं। सभी ने आरोप लगाया कि भरत भूषण, उसके पिता प्रेम कुमार, भाई संजीव कुमार और अन्य सहयोगियों ने संगठित तरीके से निवेश योजना चलाई और लोगों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये निवेश करवाए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपितों ने खुद को रिकोटा एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, केसी कंसल्टेंसी और अन्य व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़ा हुआ बताकर लोगों से संपर्क किया।
सालाना 24 प्रतिशत रिटर्न का भरोसा दिया
निवेशकों को भरोसा दिलाया गया कि उनका पैसा कीटनाशक उद्योग, कृषि परियोजनाओं, ट्रेडिंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में लगाया जाएगा तथा उन्हें सालाना 24 प्रतिशत तक रिटर्न मिलेगा। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, शुरुआत में कुछ लोगों को ब्याज और रिटर्न के नाम पर रकम लौटाई गई, जिससे उनका भरोसा मजबूत हुआ। इसके बाद उनसे और अधिक निवेश करवाया गया। जब निवेशकों ने अपनी मूल राशि वापस मांगनी शुरू की, तो उन्हें टालमटोल जवाब दिए जाने लगे। पुलिस जांच में सामने आया कि हर्षील अरोड़ा ने लगभग 83 लाख रुपये, राजेंद्र कुमार नंदल ने 40 लाख रुपये, संजीव गुप्ता ने 2 करोड़ 75 लाख रुपये, रमेश कुमार ने करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये और नीरज कुमार ने 45 लाख रुपये निवेश किए थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें कुछ भुगतान वापस मिला, लेकिन अधिकांश राशि वापस नहीं की गई। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी शिकायतों का पैटर्न लगभग समान है।
बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेजों की जांच
पुलिस जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने बैंक स्टेटमेंट, चेक, आरटीजीएस रिकाॅर्ड, भुगतान रसीदें और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए। रिपोर्ट में उल्लेख है कि करोड़ों रुपये की राशि विभिन्न खातों और संस्थाओं के माध्यम से ट्रांसफर हुई। पुलिस अब इस पूरे धन प्रवाह की जांच करेगी ताकि पता लगाया जा सके कि निवेशकों की राशि कहां गई और किन-किन लोगों तक पहुंची। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी भरत भूषण नवंबर 2025 में अचानक फरार हो गया।
आरोपित के लापता होने पर उठे सवाल
आरोपित पक्ष ने दावा किया कि भरत भूषण लापता है और सिरसा में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ताओं ने इस गुमशुदगी रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। जीरकपुर पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से यह सामने आया कि निवेशकों को व्यापार और भारी मुनाफे का झांसा देकर बड़ी रकम ली गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं और मामला धोखाधड़ी और विश्वासघात की श्रेणी में आता है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि आरोपी भरत भूषण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 और 420 के तहत मामला दर्ज किया जाए।








