इंदौर
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की शिकायतें किस तरह अलग-अलग स्तरों पर सामने आ रही हैं, इसकी तस्वीर दो आंकड़ों से मिलती है। एक ओर 4 सितंबर 2024 से 6 अक्टूबर 2026 के बीच सरकारी योजनाओं से जुड़े 45 प्रकरण दर्ज किए गए। दूसरी ओर लोकायुक्त इंदौर के वर्ष 2026 के आंकड़ों में 44 अपराध पंजीबद्ध होने की जानकारी है।
लोकायुक्त के मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा रिश्वत लेते पकड़े जाने यानी ट्रैप कार्रवाई का है। दर्ज 44 अपराधों में 40 ट्रैप के, एक पद के दुरुपयोग और तीन आय से अधिक संपत्ति से जुड़े छापों के मामले हैं। एसपी (लोकायुक्त) डा. राजेश सहाय के मुताबिक सरकारी योजनाओं से संबंधित 45 प्रकरणों की सूची में पंच परमेश्वर योजना सबसे ऊपर है। इसके तहत 18 मामले दर्ज हैं।
प्रधानमंत्री कुटीर निर्माण योजना के पांच और प्रधानमंत्री सीसी रोड निर्माण से जुड़े चार प्रकरण सूची में हैं। मनरेगा की पशुपालन योजना के तीन मामले दर्ज किए गए, जबकि मनरेगा समग्र शिक्षा अभियान के तहत बाउंड्रीवॉल निर्माण और शौचालय रिपेयरिंग से जुड़े मामलों की संख्या क्रमश: एक और दो है।
प्रधानमंत्री सोलर पैनल सब्सिडी योजना से जुड़े दो प्रकरण भी सूची में शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री सड़क निर्माण, संबल योजना, राज्य मार्ग सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास के तहत सीसी रोड निर्माण, बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं से जुड़े मामले भी दर्ज किए गए हैं। पंच परमेश्वर योजना में 18 प्रकरण होना जांच का अहम बिंदु है।
लोकायुक्त इंदौर के वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार कुल 44 अपराध पंजीबद्ध किए गए। इनमें 40 ट्रैप प्रकरण हैं। यानी दर्ज मामलों में लगभग 91 प्रतिशत ट्रैप कार्रवाई से संबंधित हैं। एक मामला पद के दुरुपयोग और तीन आय से अधिक संपत्ति के मामलों में छापे से जुड़े हैं।
ट्रैप मामलों की बड़ी संख्या बताती है कि लोकायुक्त की कार्रवाई में रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले मामलों का हिस्सा प्रमुख है। वहीं, पद के दुरुपयोग और अनुपातहीन संपत्ति से जुड़े मामलों की संख्या कम है। हालांकि, ये आंकड़े केवल दर्ज प्रकरणों का वर्गीकरण बताते हैं, इनसे भ्रष्टाचार के सभी मामलों की वास्तविक संख्या का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
27 मामलों में चालान, छह में सजा
लोकायुक्त के आंकड़ों में 27 मामलों में चालान पेश किए जाने और छह मामलों में सजा होने की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई की प्रगति का अहम संकेतक है। दोनों सूचियां भ्रष्टाचार के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं। सरकारी योजनाओं के मामलों में सड़क निर्माण, आवास, ग्रामीण विकास और अन्य योजनाओं से जुड़े प्रकरण हैं, जबकि लोकायुक्त के वार्षिक आंकड़ों में ट्रैप कार्रवाई का दबदबा दिखाई देता है।








