चंडीगढ़.
हरियाणा में भ्रूण के लिंग की जांच और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बावजूद राज्य में यह गैरकानूनी गतिविधि लगातार चुनौती बनी हुई है। वर्ष 2025 में देशभर में भ्रूण के लिंग की जानकारी देने के 83 मामले दर्ज किए गए, जिनमें अकेले हरियाणा के 64 मामले हैं।
यानी देश में दर्ज कुल मामलों का करीब 77 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा से सामने आया। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में औसतन हर छह दिन में लिंग जांच से जुड़े एक रैकेट का भंडाफोड़ हुआ।
तीन वर्षों में देश के कुल मामलों में हरियाणा की हिस्सेदारी 57.6 प्रतिशत
केंद्र सरकार द्वारा मंगलवार को राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन के सवाल के जवाब में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच देशभर में भ्रूण के लिंग की जानकारी देने के 184 मामले दर्ज हुए। इनमें 106 मामले हरियाणा में दर्ज किए, जो कुल मामलों का 57.6 प्रतिशत है। गुजरात इस अवधि में 28 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर, जबकि राजस्थान में 11 मामले दर्ज किए गए। आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में लिंग जांच के खिलाफ निगरानी और कार्रवाई दोनों बड़े स्तर पर जारी हैं।
राजस्थान से हरियाणा तक पहुंच रहीं गर्भवती महिलाएं
हाल के महीनों में सामने आए मामलों से पता चलता है कि लिंग जांच का नेटवर्क केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी जुड़ा हुआ है। 16 जुलाई को राजस्थान पुलिस की टीम ने सिरसा के डबवाली में एक बिचौलिए को गिरफ्तार किया और उस निजी अस्पताल पर छापा मारा, जहां कथित तौर पर भ्रूण के लिंग की जांच की जा रही थी। राजस्थान पुलिस करीब छह महीने से इस नेटवर्क पर नजर रख रही थी। आरोप है कि राजस्थान के हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और बीकानेर जिलों से गर्भवती महिलाओं को लिंग जांच के लिए डबवाली लाया जाता था।
करनाल में डॉक्टर रंगे हाथ पकड़ा गया
5 जुलाई को करनाल के इंद्री में एक डॉक्टर को कथित तौर पर भ्रूण के लिंग की जांच करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके अलावा 27 मई को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक मकान पर छापा मारकर लिंग जांच से जुड़े सात लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि रोहतक की गर्भवती महिलाएं कथित तौर पर लिंग जांच के लिए अमरोहा ले जाई जाती थीं। मौके से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन भी बरामद की गई।
यूपी के सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने की मांग
हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य डॉ. सुमिता मिश्रा ने जून में उत्तर प्रदेश के अपने समकक्ष को पत्र लिखकर हरियाणा से सटे जिलों में कार्रवाई करने वाली टीमों को प्रशासनिक और पुलिस सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसका उद्देश्य अंतरराज्यीय स्तर पर संचालित लिंग जांच नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करना है।हरियाणा सरकार के अनुसार जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच राज्य में 84 छापेमारी की गईं। इनमें से 37 छापे उत्तर प्रदेश में मारे गए।
2015 से अब तक 1,400 से अधिक एफआईआर
'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' कार्यक्रम के पूर्व प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर जीएल सिंघल के अनुसार, अभियान की शुरुआत के बाद से हरियाणा में भ्रूण के लिंग की जांच के खिलाफ निगरानी काफी बढ़ी है। उनके मुताबिक किसी अन्य राज्य की तुलना में हरियाणा ने अधिक छापेमारी और डिकॉय ऑपरेशन किए हैं।उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 से अब तक राज्य में 1,400 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। हालांकि, उनके अनुसार अब उत्तर प्रदेश भी लिंग जांच के मामलों का एक प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
तीन साल में कन्या भ्रूण हत्या के 19 मामले
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 से 2024 के बीच हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या के 19 मामले दर्ज हुए। इस मामले में हरियाणा देश में चौथे स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक 41 मामले दर्ज हुए, जबकि मध्य प्रदेश में 31 और महाराष्ट्र में 28 मामले सामने आए। पंजाब में 12 मामले दर्ज हुए, जबकि हिमाचल प्रदेश में इस अवधि के दौरान कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।
जन्म के समय लिंगानुपात देश में चौथा सबसे कम
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार 'सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम-स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट 2024' में हरियाणा का जन्म के समय लिंगानुपात 891 रहा। इसका अर्थ है कि राज्य में प्रति 1,000 पुरुषों पर 891 लड़कियों का जन्म दर्ज हुआ। यह देश में चौथा सबसे कम लिंगानुपात है।उत्तराखंड 870 के साथ सबसे नीचे रहा। इसके बाद दिल्ली 874 और मध्य प्रदेश 885 पर रहे।
छह महीने में 900 तक पहुंचा हरियाणा का लिंगानुपात
हरियाणा सरकार के अपने आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2025 में राज्य का जन्म के समय लिंगानुपात 923 था, जो 2026 के पहले छह महीनों यानी 30 जून तक घटकर 900 रह गया।जिलों में चरखी दादरी की स्थिति सबसे खराब रही, जहां लिंगानुपात 829 दर्ज किया गया। महेंद्रगढ़ में यह आंकड़ा 869 रहा। गुरुग्राम और झज्जर में 871-871 तथा जींद में 878 रहा। राज्य के 11 जिलों में जन्म के समय लिंगानुपात 900 से नीचे दर्ज किया गया।
कार्रवाई के साथ सामाजिक सोच बदलना भी चुनौती
आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में लिंग जांच के खिलाफ प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है, लेकिन अंतरराज्यीय नेटवर्क के कारण चुनौती बनी है। विशेषज्ञों के अनुसार केवल छापेमारी और एफआईआर से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निगरानी, अंतरराज्यीय पुलिस एवं स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को मजबूत करना जरूरी है।








