भोपाल। हर माता-पिता अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने और उनके सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए अपनी जीवनभर की पूंजी लगा देते हैं। बड़े अरमानों और ढेरों सपनों के साथ वे अपने कलेजे के टुकड़े को घर से दूर, भोपाल के नामी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन और स्टाफ पर अटूट भरोसा करके भेजते हैं। लेकिन क्या हो जब वही रखवाले ही भक्षक बन जाएं?
देश के सबसे विश्वसनीय समाचार पत्र “दैनिक भास्कर” की इस विशेष खोजी रिपोर्ट और स्टिंग ऑपरेशन में एक ऐसा चौंकाने वाला और भयावह सच सामने आया है, जिसने भोपाल के शैक्षणिक जगत और अभिभावकों के होश उड़ा दिए हैं। भोपाल के होशंगाबाद रोड स्थित 11 मील (11th Mile) के पास स्थित एक प्रतिष्ठित और भरोसेमंद प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कैंपस के भीतर ड्रग्स सप्लाई का काला खेल चल रहा था। इस घिनौने रैकेट का मुख्य सूत्रधार कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी का ही सुरक्षा सुपरवाइजर (Security Supervisor) मिस्टर गोविंद पाया गया।
रखवाला ही निकला जहर का सौदागर
दैनिक भास्कर की टीम ने जब इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन किया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। सुरक्षा सुपरवाइजर गोविंद, जिसकी जिम्मेदारी कैंपस के भीतर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोकना था, वही खुद कैंपस के अंदर छात्रों तक ड्रग्स और नशीले पदार्थ पहुंचाने का जरिया बना हुआ था। इस खुलासे ने यूनिवर्सिटी कैंपस के सुरक्षा तंत्र की पोल खोलकर रख दी है।
प्रबंधन की साख दांव पर, पर गलती कहां हुई?
यह खबर किसी विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करने या उसे बदनाम करने के उद्देश्य से नहीं है। विश्वविद्यालय प्रबंधन की मंशा पर कोई संदेह नहीं है, क्योंकि वे खुद अपने छात्रों को बेहतर माहौल देना चाहते हैं। लेकिन प्रबंधन से यहां एक गंभीर और अक्षम्य चूक जरूर हुई है—सुरक्षा एजेंसियों को बेहद हल्के में लेना।
अक्सर देखा जाता है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन बाहरी सुरक्षा एजेंसियों (Security Agencies) को ठेका देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है। वे कभी इस बात की तहकीकात नहीं करते कि जिन गार्ड्स को कैंपस में तैनात किया जा रहा है, उनका पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification), फिटनेस टेस्ट और चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate) सही है भी या नहीं। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर आपराधिक प्रवृत्ति के लोग सुरक्षा गार्ड की वर्दी पहनकर कैंपस के भीतर दाखिल हो जाते हैं और छात्रों के भविष्य में जहर घोलने का काम करते हैं।
अब जागने का वक्त: कड़े कदम उठाने की जरूरत
दैनिक भास्कर के इस खुलासे के बाद भोपाल ही नहीं, बल्कि देश भर के सभी निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों के प्रबंधन के लिए यह एक ‘वेक-अप कॉल’ (जागने का वक्त) है।
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सख्त पुलिस वेरिफिकेशन: सभी सुरक्षा गार्डों और सुपरवाइजरों का अनिवार्य रूप से गहन पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाए।
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अपराधिक रिकॉर्ड की जांच: सुरक्षा एजेंसी हायर करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके हर एक कर्मचारी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न हो।
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फिटनेस और चरित्र प्रमाण पत्र: चरित्र और शारीरिक-मानसिक फिटनेस का कड़ाई से मूल्यांकन हो।
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सीधे जवाबदेही: यदि कोई एजेंसी बिना वेरिफिकेशन के स्टाफ भेजती है, तो प्रबंधन उस सुरक्षा एजेंसी पर सख्त कानूनी कार्रवाई करे।
माता-पिता का भरोसा और देश के युवाओं का भविष्य दांव पर है। समय रहते यदि सुरक्षा इंतजामों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो शिक्षा के ये मंदिर नशे के सौदागरों की सुरक्षित पनाहगाह बन जाएंगे। उम्मीद है कि इस खुलासे के बाद प्रबंधन अपनी नींद से जागेगा और कैंपस को पूरी तरह से सुरक्षित व नशामुक्त बनाने के लिए कड़े कदम उठाएगा।
स्रोत एवं आभार: इस खबर का पूरा विवरण और वीडियो साक्ष्य आप दैनिक भास्कर की आधिकारिक वेबसाइट पर इस लिंक के माध्यम से देख सकते हैं।
https://www.bhaskar.com/local/mp/news/mp-rajasthan-drugs-racket-university-deal-car-138438488.html








