अपराधी कितना भी डीपफेक का आवरण ओढ़े, उसे खोज निकालेंगे: मुख्यमंत्री
अंतरराष्ट्रीय ‘टेक संगम 2026’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- 'सीआईडी' की रील लाइफ अब यूपी में रियल लाइफ बनी
एआई मददगार हो, निर्णायक नहीं, तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए: सीएम
भू-माफिया से मुक्त कराई गई 100 एकड़ जमीन पर खड़ा है विश्वस्तरीय फॉरेंसिक संस्थान: मुख्यमंत्री
देश के पहले 'LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का शुभारंभ, क्वांटम तकनीक और कानून के समन्वय को मिलेगी गति
2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य, यूपी में 2017 के बाद लगे 35 हजार नए उद्योग
लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीपफेक जैसी तकनीकों के दौर में अपराधी कितना भी तकनीक का आवरण ओढ़ ले, उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक और विधिक क्षमता उसे खोज निकालेगी। एआई हमारे लिए मददगार हो सकता है, लेकिन उसे निर्णायक नहीं बनना चाहिए। तकनीक का संचालन मानव विवेक से होना चाहिए, न कि मनुष्य तकनीक के विवेक पर निर्भर हो जाए। पूरी तरह एआई पर निर्भरता भविष्य में संकट बन सकती है। वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और आधुनिक तकनीक के समन्वय से अपराध अनुसंधान को प्रभावी बनाने के साथ न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'टेक संगम 2026' को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने क्वांटम फॉरेंसिक्स और विधिक अनुपालन के क्षेत्र में कार्य करने वाले 'LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल लॉन्च किया, 'अभेद्य' परियोजना की आधारशिला रखी और 'एआई इन कंस्ट्रक्शन' पुस्तक का विमोचन भी किया। सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, क्वांटम तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और एआई के न्यायिक व प्रशासनिक उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
भू-माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर बना विश्वस्तरीय संस्थान
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए बताया कि करीब 100 एकड़ की जिस जमीन पर आज विश्वस्तरीय फॉरेंसिक संस्थान खड़ा है, उस पर कभी लखनऊ के एक बड़े भू-माफिया का कब्जा था। उस समय पुलिस भी इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। वर्ष 2017 में पुलिस अधिकारियों से इसकी जानकारी मिलने के बाद जांच कराई गई और भू-माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। दूसरी एफआईआर दर्ज होते ही उसने आत्मसमर्पण कर जमीन छोड़ दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले लखनऊ में साइबर फॉरेंसिक और क्वांटम तकनीक जैसे विषयों पर चर्चा करना भी सपने जैसा लगता था। आज उसी जमीन पर बना संस्थान प्रदेश में वैज्ञानिक जांच, आधुनिक अपराध अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा दे रहा है।
'सीआईडी' सीरियल की ‘रील लाइफ’ अब यूपी में रियल लाइफ
फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता समझाते हुए मुख्यमंत्री ने लोकप्रिय टीवी सीरियल 'सीआईडी' का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले लोग टेलीविजन पर देखते थे कि एक बाल या फिंगरप्रिंट के आधार पर अपराधी तक कैसे पहुंचा जाता है। अब फॉरेंसिक विज्ञान और आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसी जांच वास्तविक जीवन में संभव हो रही है।
न्याय मिलने में देरी का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने एक माफिया के मामले का जिक्र किया, जिसने वर्ष 1980 में पहला अपराध किया था, लेकिन साक्ष्यों के अभाव और डीएनए सैंपल नष्ट होने के कारण उसे वर्ष 2022 में, यानी 42 साल बाद सजा मिल सकी। यह उदाहरण बताता है कि अपराध की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य कितने महत्त्वपूर्ण हैं और समय पर साक्ष्य जुटाना न्याय प्रक्रिया के लिए क्यों जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब विकसित की जा रही हैं। इनमें 12 लैब तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य अंतिम चरण में हैं। इसके अतिरिक्त 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं, जिससे घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने और जांच को गति देने में मदद मिलेगी। उद्देश्य है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विवेचना मजबूत हो और न्यायालयों में मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी कम हो।
'लॉ विद लैब्स' की अवधारणा को आगे बढ़ाएगा LEXQ सेंटर
मुख्यमंत्री ने यूपीएसआईएफएफ की 'लॉ विद लैब्स' यानी कानून और प्रयोगशाला के समन्वय की अवधारणा को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विज्ञान और कानून को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। वैज्ञानिक जांच की विश्वसनीयता और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप साक्ष्यों का उपयोग न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाता है। इसी उद्देश्य से शुरू किया गया LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्वांटम तकनीक को कानून, सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान से जोड़ेगा। इसमें 'LEX' का संबंध कानून और 'Q' का संबंध क्वांटम से है। सेंटर के माध्यम से क्वांटम फॉरेंसिक्स, विधिक अनुपालन, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे कानून और आधुनिक विज्ञान के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे।
2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर में डेटा और तकनीक विकास के प्रमुख आधार बन चुके हैं। उन्होंने डेटा को नया तेल (जिस तरह 20वीं सदी में कच्चा तेल अर्थव्यवस्था व व्यापार के लिए सबसे शक्तिशाली था, उसकी तरह 21वीं सदी में डेटा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है) बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश एआई और डेटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने नोएडा में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट स्थापित किए जाने का भी उल्लेख करते हुए कहा कि डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और एआई जैसे क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और नए अवसर पैदा होंगे।
2017 के बाद प्रदेश में लगे 35 हजार नए उद्योग
औद्योगिक विकास और निवेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 से 2017 तक उत्तर प्रदेश में करीब 14 हजार उद्योग स्थापित हुए थे, जबकि 2017 के बाद 35 हजार नए उद्योग लगे हैं। उन्होंने इस बदलाव का संबंध बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल से जोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पास करीब 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक है और राज्य को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
लखनऊ स्थित एचसीएल सेंटर का उदाहरण देते हुए सीएम ने बताया कि वर्ष 2017 में वहां करीब 100 कर्मचारी काम करते थे, अब यह संख्या बढ़कर 12,600 हो गई है। महिलाएं भी रात की शिफ्ट में काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने इसे सुरक्षा के माहौल में आए बदलाव और महिलाओं की बढ़ती कार्यभागीदारी के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
अयोध्या से एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक विकास का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत और शहर में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में वहां बिजली की उपलब्धता सीमित थी। अब अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है और वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है। उत्तर प्रदेश में देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा है। प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय और 17 घरेलू हवाई अड्डे बने हैं। बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश के अनुकूल वातावरण से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और उत्तर प्रदेश देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है।
संस्थान ने पांच हजार से अधिक अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण
इस अवसर पर यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने संस्थान की स्थापना और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 01 अगस्त 2021 को संस्थान की आधारशिला रखी थी। संस्थान में डीएनए, साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक्स सहित आधुनिक तकनीकी प्रयोगशालाएं विकसित की गई हैं। यहां एआई, रोबोटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों के माध्यम से अपराध अनुसंधान को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।
डॉ. गोस्वामी ने बताया कि संस्थान अब तक पुलिस, रक्षा बलों और प्रशासन से जुड़े पांच हजार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सम्मेलन में साइबर बुलिंग और डिजिटल एविडेंस जैसे विषयों पर हो रहे विमर्श का उल्लेख किया। उन्होंने अपराध स्थल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के प्रशिक्षण और आधुनिक फॉरेंसिक क्षमता विकसित करने में संस्थान की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
यूपी के छात्र भारत का भविष्य लिखेंगे: प्रो. तनुजा सिंह
यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस, अमेरिका की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह ने सम्मेलन में उत्तर प्रदेश में एआई और साइबर तकनीक के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश इन क्षेत्रों में केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता विकसित कर रहा है। प्रदेश के छात्र देश के भविष्य को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ एमओयू
टेक संगम 2026 के दौरान शिक्षा, तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस (अमेरिका), जीवाजी यूनिवर्सिटी (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), सैन्स इंस्टीट्यूट (अमेरिका), उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन (लखनऊ), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (नई दिल्ली), डायरेक्टरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस सर्विसेज (नई दिल्ली), डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (नई दिल्ली), सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (नई दिल्ली) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक, नई दिल्ली) शामिल हैं।
कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, यूनिवर्सिटी ऑफ इंडियानापोलिस की प्रेसिडेंट प्रो. तनुजा सिंह, रक्षा साइबर एजेंसी के महानिदेशक रियर एडमिरल संजय सचदेवा, प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, सरोजनी नगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह और यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी सहित देश-विदेश से आए साइबर एवं फॉरेंसिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।








