एक एकड़ मड़ुआ की खेती से 60 हजार तक मुनाफा! सारण में मोटे अनाज की खेती को मिलेगा बढ़ावा

SHARE:

नागेंद्र सिंह, जलालपुर (सारण)
 कभी गरीबों के भोजन का प्रमुख हिस्सा रहा मड़ुआ आज पौष्टिकता के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम बन रहा है। श्रीअन्न की बढ़ती मांग और कम पानी में अच्छी उपज की संभावना को देखते हुए सारण जिले में इसकी खेती का रकबा छह गुना बढ़ाने की तैयारी है।

कृषि विभाग ने अगले तीन वर्षों में मड़ुआ की खेती का क्षेत्रफल 500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 3000 हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध कराना जरूरी होगा।

जलालपुर में 50 एकड़ में हुई खेती
जलालपुर प्रखंड में मड़ुआ की खेती को लेकर किसानों की दिलचस्पी बढ़ रही है। पिछले वर्ष प्रखंड की सभी 15 पंचायतों में 45 किलोग्राम बीज वितरित किए गए थे। इससे 180 किसानों ने लगभग 5.63 एकड़ में खेती की। इस वर्ष खेती का दायरा बढ़कर करीब 50 एकड़ हो गया है।

प्रखंड कृषि पदाधिकारी रवि अटल ने बताया कि उनके मार्गदर्शन में इस वर्ष 50 एकड़ भूमि में मड़ुआ की खेती की गई है। इसके अलावा अन्य किसानों ने भी इसकी खेती की है। रेवाड़ी पंचायत के मंझवलिया गांव के किसान संतोष कुमार सिंह ने लगभग एक एकड़ में मड़ुआ लगाया है।

सम्होता के किसान कमल सिंह, शिवनाथ सिंह और उमानाथ सिंह का कहना है कि समय पर पर्याप्त बीज मिले तो वे खेती का क्षेत्रफल बढ़ाने को तैयार हैं। किसानों ने इसके लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन और उपज की बिक्री के लिए उचित बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत भी बताई।

एक एकड़ में 60 हजार तक मुनाफे की उम्मीद
कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र चंद्र चंदोला के अनुसार, वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर एक एकड़ में 15 से 16 क्विंटल तक मड़ुआ की उपज मिल सकती है। उन्नत किस्मों और बेहतर प्रबंधन से उत्पादन 18 क्विंटल तक पहुंचने की संभावना है।

लागत और बाजार भाव अनुकूल रहने पर किसान एक एकड़ से 45 से 60 हजार रुपये तक शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं। मड़ुआ की कई किस्में 65 से 100 दिनों में तैयार हो जाती हैं।

बिरसा मड़ुआ, वीएल मड़ुआ और जीपीयू-28 जैसी किस्मों का चयन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है।

पोषण और खेती, दोनों में लाभकारी
मड़ुआ कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन और रेशे का अच्छा स्रोत है। प्रति 100 ग्राम साबुत मड़ुआ में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम, 3.9 मिलीग्राम आयरन, 3.6 ग्राम रेशा और 7.3 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।

यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त भी है। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. वशिष्ठ कुमार सिंह के अनुसार, संतुलित आहार में मड़ुआ को शामिल कर इसके पोषक तत्वों का लाभ लिया जा सकता है। इसकी रोटी, दलिया, लपसी, उपमा, डोसा और लड्डू जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं।

सहायक तकनीकी प्रबंधक सह प्रखंड उद्यान पदाधिकारी अजय प्रकाश ने बताया कि मड़ुआ के अलावा बाजरा, ज्वार, कोदो, कुटकी, सांवा, चेना और कंगनी की खेती भी कम पानी में की जा सकती है।

कृषि विभाग की ओर से श्रीअन्न के बीज अनुदानित दर पर उपलब्ध कराने, प्रति किलोग्राम 30 रुपये की छूट देने और प्रदर्शन के लिए मुफ्त बीज देने का प्रावधान है। समय पर बीज, तकनीकी सलाह और बाजार की सुविधा मिलने से श्रीअन्न की खेती किसानों के लिए बेहतर कमाई का विकल्प बन सकती है।

 

1
Default choosing

Did you like our plugin?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें