खप्पर यात्रा में आधी रात तलवार लेकर निकलीं देवी, डिप्टी CM विजय शर्मा ने किए दर्शन

SHARE:

कवर्धा.

छत्तीसगढ़ के कवर्धा में नवरात्रि की महाअष्टमी पर वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार मध्यरात्रि में खप्पर यात्रा निकाली गई. देवी आराधना और धार्मिक आस्था के इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी देवी स्वरूप खप्पर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया.

परंपरा के अनुसार, नगर के चंडी मंदिर, दंतेश्वरी मंदिर और परमेश्वरी मंदिर से रात करीब 12:30 बजे खप्पर यात्रा शुरू हुई. तीनों मंदिरों से 15-15 मिनट के अंतराल पर यात्राएं निकाली गईं. इसके बाद यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों से होकर आगे बढ़ी. देवांगनपारा, ठाकुरपारा, एकता चौक, सिग्नल चौक, डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक, राजमहल चौक और गुप्ता पारा सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए खप्पर यात्रा ने नगर का भ्रमण किया. निर्धारित मार्गों से भ्रमण पूरा करने के बाद खप्पर अपने-अपने मंदिरों में पहुंचे, यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई. इस तरह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा यह आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. नवरात्रि के दौरान आयोजित इस धार्मिक यात्रा में श्रद्धालुओं का खासा उत्साह देखने को मिला. कार्यक्रम संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में वाहनों के सड़कों पर निकलने से नगर के कुछ हिस्सों में कई घंटों तक जाम लगा रहा. हालांकि, इन परिस्थितियों के बावजूद खप्पर यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई.

रियासत काल से चली आ रही है परंपरा –

  • खप्पर का धार्मिक महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खप्पर भगवान शिव के भैरव स्वरूप और मां दुर्गा के काली स्वरूप से जुड़ा महत्वपूर्ण पात्र है.
  • बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक: मान्यता है कि मां काली ने रक्तबीज का वध करते समय उसके रक्त को खप्पर में धारण किया था. इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है.
  • नकारात्मक शक्तियों के शमन की मान्यता: खप्पर यात्रा को नगर और गांव को बुरी नजर, महामारी तथा अकाल मृत्यु जैसी विपत्तियों से बचाने वाला धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है.
  • जलते अंगारों का महत्व: यात्रा के दौरान जलते अंगारों से भरा खप्पर धारण करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे क्षेत्र की नकारात्मक शक्तियों का शमन होता है.
  • कठिन साधना और भक्ति: अनुष्ठान में शामिल साधक कई दिनों तक उपवास, ब्रह्मचर्य और मौन व्रत जैसे नियमों का पालन करते हैं.
  • आस्था और समर्पण का प्रदर्शन: साधक यात्रा के दौरान सिर या हाथों पर जलते अंगारों वाला खप्पर धारण कर अपनी साधना, श्रद्धा और देवी के प्रति समर्पण प्रदर्शित करते हैं.

सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने ड्रोन से की निगरानी
खप्पर यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे. यात्रा मार्ग पर पर्याप्त संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी, वहीं निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली गई. इसके अलावा, सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी गई, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक या भड़काऊ पोस्ट से माहौल प्रभावित न हो और अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके.

1
Default choosing

Did you like our plugin?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें