हरियाणा में रिटायर्ड टीचर की पेंशन रोकने पर हाई कोर्ट सख्त, नायब सरकार से मांगा जवाब

SHARE:

चंडीगढ़
 सेवानिवृत्त शिक्षक की पेंशन रोके जाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ललित भारद्वाज का कहना है कि सेना में नियमानुसार नाम बदलने के बावजूद बीएड डिग्री में नाम के अंतर को लेकर उनके खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई। जांच में डिग्री सही पाई गई और पुलिस ने अदालत में रद्द करने की रिपोर्ट पेश की, फिर भी अप्रैल 2026 में उनकी पेंशन रोक दी गई।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ के समक्ष दायर याचिका में भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में 12 वर्ष से अधिक सेवा की। चिकित्सा आधार पर सेना से छुट्टी मिलने के बाद वह शिक्षा विभाग में शिक्षक नियुक्त हुए। सेना में रहते हुए वर्ष 1991 में उन्होंने नियमानुसार अपना नाम लाला राम से बदलकर ललित भारद्वाज किया था। यह बदलाव सेना के पार्ट-दो आदेश से अधिसूचित हुआ था।

याचिकाकर्ता का आरोप
याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्होंने शिक्षा विभाग में 20 वर्ष से अधिक सेवा की और उनका सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा। वह 13 अप्रैल 2022 से पीजीटी अंग्रेजी के पद पर पदोन्नत हुए और 31 दिसंबर 2024 को सेवानिवृत्त हुए। द्वितीय एसीपी लाभ की मांग विभाग ने स्वीकार नहीं की।

बीएड डिग्री और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में नाम अलग होने के आरोप में 17 जनवरी 2026 को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच के दौरान संबंधित विश्वविद्यालय ने डिग्री सही बताई। जांच अधिकारी ने तीन जुलाई 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष रद्द करने की रिपोर्ट पेश की। शिकायतकर्ता ने भी रिपोर्ट के निष्कर्षों से सहमति जताई थी।

सरकार ने अदालत को क्या बताया?
सरकार ने अदालत को बताया कि विभाग ने पुलिस रिपोर्ट के विरोध में आपत्ति याचिका दायर की है। शिकायतकर्ता का बयान विभाग की पूर्व अनुमति के बिना दिया गया था और उसे विभाग का आधिकारिक पक्ष नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने दबाव डालकर उससे संतोषजनक रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कराए। मामला अदालत में विचाराधीन है और लोकायुक्त के समक्ष भी शिकायत लंबित है।

सुनवाई में राज्य सरकार के वकील इस बात का खंडन नहीं कर सके कि 31 दिसंबर 2024 को सेवानिवृत्ति तक याचिकाकर्ता को कोई आरोपपत्र या कारण बताओ नोटिस जारी नहीं हुआ था। हाई कोर्ट ने आगे की दलीलों के लिए मामला 17 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है।

1
Default choosing

Did you like our plugin?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें