Bhopal News: भोपाल के 69 में से 47 चौराहों पर खतरनाक ध्वनि प्रदूषण, लोगों की सेहत पर खतरा

SHARE:

भोपाल.

भोपाल के चौराहों पर ट्रैफिक और हॉर्न का शोर तय सीमा पार कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की जांच में 69 प्रमुख चौराहों में से 47 पर ध्वनि प्रदूषण निर्धारित मानक से ज्यादा मिला, जबकि 22 पर सीमा के भीतर रहा।

सबसे ज्यादा औसत शोर काली मंदिर तिराहे पर 89.90 डेसिबल और अल्पना तिराहे पर 88.56 डेसिबल दर्ज हुआ। व्यावसायिक क्षेत्रों में दिन के समय निर्धारित सीमा 65 डेसिबल है। इस लिहाज से दोनों जगह क्रमशः 24.90 और 23.56 डेसिबल ज्यादा शोर मिला। पीसीबी ने 21 से 24 सितंबर 2026 के बीच सुबह 10 से शाम 6 बजे तक जांच की। नियम 5(4) के अलग आकलन में 21 चौराहों पर सीमा पार हुई। आम आदमी पर क्या असर यदि कोई यातायात पुलिसकर्मी, वाहन चालक, ठेला संचालक या दुकानदार रोज कई घंटे ऐसे शोर के बीच रहता है, तो उसका तनाव एक-दो मिनट वहां से गुजरने वाले व्यक्ति की तुलना में ज्यादा हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रीय व्यावसायिक सुरक्षा संस्थान ने काम के दौरान 85 डेसिबल के शोर पर 8 घंटे की सीमा सुझाई है। लंबे समय तक ऐसे शोर में खड़े रहने से कान, आंख में खराबी और मानसिक पीड़ा भी हो सकती है।

रिहायशी इलाकों में भी राहत नहीं
तय सीमा 55 डेसिबल है, लेकिन कोहेफिजा में 76.34 और त्रिलंगा में 75.02 डेसिबल शोर

लाउडस्पीकर बंद, फिर भी शोर ज्यादा
मामला ट्रैफिक सिग्नलों पर लगे सार्वजनिक लाउडस्पीकर की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर एनजीटी ने 21 मई 2026 को पीसीबी को ध्वनि स्तर की व्यापक जांच, ध्वनि मानचित्रण और उद्घोषणा तंत्र के नियमों की समीक्षा के निर्देश दिए थे। इसके बाद पीसीबी ने 21 से 24 सितंबर 2026 तक सुबह 10 से शाम 6 बजे के बीच चौराहों पर शोर मापा। याचिकाकर्ता के वकील हर्षवर्धन तिवारी के मुताबिक, जांच में 69 में से 68 चौराहों पर लाउडस्पीकर बंद थे। केवल कोलार तिराहे पर चालू मिला। ज्यादा शोर का कारण केवल लाउडस्पीकर होना साबित नहीं होता। वाहनों की आवाजाही आसपास शोर बढ़ाती हैं। जांच में 22 चौराहों पर शोर तय सीमा के भीतर मिला। वहीं, नियम 5(4) के अलग आकलन में 21 चौराहों पर निर्धारित सीमा पार हुई।

1
Default choosing

Did you like our plugin?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें