जयपुर
राजस्थान में संचालित डिजिटल परियोजनाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए शुक्रवार को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों का 33 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जयपुर स्थित भामाशाह डेटा सेंटर पहुंचा। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी नंद कुमारम के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने यहां आयोजित कार्यशाला में भाग लिया। इस दौरान डिजिटल सेवाओं के विस्तार, तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग और राज्यों के बीच अनुभव साझा करने पर विचार-विमर्श किया गया।
दो दिवसीय अध्ययन दौरे में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के 25 अधिकारी तथा राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के आठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में प्रतिनिधिमंडल को भामाशाह डेटा सेंटर, नेटवर्क संचालन केंद्र, सुरक्षा संचालन केंद्र, राजस्थान राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (आरस्वान) और राजनेट की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं के तकनीकी पहलुओं और अन्य राज्यों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव (डिजिटल गवर्नेंस) एवं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी नंद कुमारम ने कहा कि डिजिटल शासन की सफलता केवल किसी राज्य की आर्थिक स्थिति या उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था, स्पष्ट कार्ययोजना और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में पहले से संचालित सफल डिजिटल परियोजनाओं के अनुभवों का लाभ उठाकर नई व्यवस्थाओं को कम समय और बेहतर संसाधन प्रबंधन के साथ लागू किया जा सकता है।
नंद कुमारम ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका केवल तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य विभागों की सेवाओं पर भी पड़ता है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में ई-ऑफिस व्यवस्था को ब्लॉक स्तर तक विस्तारित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे वहां प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आमजन की समस्याओं के समाधान में सहायता मिलेगी।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी नंद कुमारम ने परिवार आधारित डिजिटल डेटाबेस की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इससे सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की सही पहचान करने और लाभ वितरण में त्रुटियां कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के डिजिटल विश्लेषण को भी महत्वपूर्ण बताया, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सामने आने वाली जनसमस्याओं की पहचान कर संबंधित विभागों तक समय पर जानकारी पहुंचाई जा सके।
नंद कुमारम ने डेटा सेंटर जैसी तकनीकी सुविधाओं के बेहतर उपयोग पर जोर देते हुए पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आपदा की स्थिति में राजस्थान के डेटा सेंटर को वैकल्पिक केंद्र के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल परियोजनाओं को लागू करने से पहले उनकी लागत, समयसीमा, आवश्यक मानव संसाधन और अपेक्षित लाभ का स्पष्ट आकलन किया जाना चाहिए। साथ ही, तकनीकी संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विभागों के अनुभवी अधिकारियों को जोड़ने पर भी जोर दिया।
कार्यशाला में सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के तकनीकी निदेशक अखिलेश मित्तल सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे
दो दिवसीय अध्ययन दौरे के दूसरे दिन शनिवार, 10 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल योजना भवन स्थित आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय में जन आधार योजना की कार्यप्रणाली का अध्ययन करेगा। इसके बाद अधिकारी सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क 181 का दौरा कर जनशिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की डिजिटल व्यवस्था की जानकारी प्राप्त करेंगे।








