रांची
24 सितंबर को जब NEET PG 2026 के नतीजे घोषित हुए, झारखंड का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर आ गया। रांची में जन्मीं और एयर फोर्स स्टेशन कानपुर में तैनात 28 वर्षीय मेडिकल ऑफिसर स्क्वाड्रन लीडर पल्लाक्षी प्रसाद ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की थी।
डायरेक्टर जनरल आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (DGAFMS) एयर मार्शल संदीप थरेजा ने AFMC के C3 बैच की पूर्व छात्रा को बधाई दी और इसे आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज के लिए गर्व की उपलब्धि बताया।
पल्लाक्षी , जिनके नाम का अर्थ 'कोमल' है, उनके लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। यह सफर बरसों की अनुशासित पढ़ाई, सैन्य सेवा और सीखने के प्रति अटूट समर्पण से भरा रहा है।
TOI से बातचीत में पल्लाक्षी ने कहा, "मैं हमेशा से डॉक्टर बनना चाहती हूं। भले ही मेरे माता-पिता दोनों इंजीनियर हैं, लेकिन उन्होंने कभी मेरे सपने के लिए मना नहीं किया। उन्होंने बस मेरा साथ दिया।"
पल्लाक्षी का करियर
रांची में जन्मीं और हैदराबाद में पली-बढ़ीं पल्लाक्षी ने दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की और बिना कोई ड्रॉप ईयर लिए NEET UG 2016 में 1312वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की थी।
अपने गृह राज्य में दाखिले के नियमों के कारण उनके विकल्प सीमित हो गए थे, लेकिन अपनी मां के कहने पर आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल कॉलेज (AFMC) में आवेदन करने से उनकी जिंदगी बदल गई।
सिलेक्शन प्रोसेस में लड़कियों की मेरिट लिस्ट में तीसरा स्थान हासिल करने के बाद उन्होंने AFMC में दाखिला लिया और अपने बैच में ओवरऑल मेरिट में छठे स्थान पर रहीं।
उन्होंने याद करते हुए कहा, "मुझे AFMC कैंपस और उससे जुड़ी हर चीज से लगाव हो गया। ग्रेजुएशन पूरा होने तक, मुझे यूनिफॉर्म पहनने में कोई हिचकिचाहट या अजनबीपन महसूस नहीं होता था। इसलिए, परमानेंट कमीशन लेने का फैसला मेरे लिए बहुत स्वाभाविक था।"
नेवी में हुआ सिलेक्शन
15 मई, 2021 को इंडियन नेवी में कमीशन मिलने के बाद, उन्होंने 2025 में इंडियन एयर फोर्स में जाने से पहले लगभग ढाई साल तक एक वॉरशिप पर मेडिकल ऑफिसर के तौर पर काम किया।
उनका कहना है कि शिप पर की गई सर्विस ने उनके व्यक्तित्व और काम के प्रति नज़रिए, दोनों को ही बेहतर बनाया। यूनिफॉर्म में रहते हुए भारत के सबसे मुश्किल पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में से एक की तैयारी करने के लिए असाधारण अनुशासन की जरूरत थी।
उन्होंने कहा, "मरीजों को देखने के बीच, ड्यूटी के बाद, किताबों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए, जब भी समय मिलता, मैं पढ़ाई करती थी। बात रोज़ घंटों तक पढ़ने की नहीं थी, बल्कि लगातार पढ़ते रहने की थी,"
अपने मेंटर और मिलिट्री डॉक्टर डॉ. विनीत बेहरा की देखरेख में, उन्होंने अपनी इंटर्नशिप के दौरान बॉम्बे मेडिकल कांग्रेस में क्रॉनिक किडनी डिजीज पर एक रिसर्च पेपर भी पेश किया।
पलाच्छी का परिवार
अब वह स्पेशलाइज़ेशन के लिए रेडियोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन और डर्मेटोलॉजी के बारे में सोच रही हैं।
उनके पिता, चंद्र किशोर प्रसाद, जो सेंट्रल रेलवे में प्रिंसिपल चीफ सेफ्टी ऑफ़िसर (PCSO) हैं और 'KAVACH किताब के सह-लेखक हैं और मां इंफोसिस में प्रैक्टिस हेड हैं।
पल्लाक्षी की शादी IAF के एक डॉक्टर से हुई है और वह 2025 से कानपुर में पोस्टेड हैं। जबकि उनके माता-पिता और छोटे भाई, क्षितिज प्रसाद, सभी ने इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र को चुना, पल्लाक्षी परिवार में सबसे अलग रहीं।
उन्होंने डॉक्टर बनने के अपने बचपन के सपने को पूरा किया और बाद में आर्म्ड फोर्सेज में सेवा करने वाली परिवार की पहली सदस्य बनीं। उनके भाई हैदराबाद से कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट हैं।








