कैबिनेट मंत्रियों के वोटर लिस्ट में नाम पर चुनाव आयोग ने दी सफाई, जानें क्या है नियम

SHARE:

नई दिल्ली
 कैबिनेट मंत्रियों के उनके सामान्य निवास स्थान के बजाय किसी अन्य जगह की वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने को लेकर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है।

आयोग ने कहा है कि SIR के ड्राफ्ट रोल में पहले से फ्लैग किए गए जनप्रतिनिधियों और कुछ अन्य वर्गों के नाम शामिल किए गए हैं, ताकि क्लेम-ऑब्जेक्शन की अवधि में जरूरी डॉक्युमेंट्स जुटाए जा सकें।

चुनाव आयोग ने आरपी एक्ट की धाराओं का दिया हवाला
चुनाव आयोग ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 की धारा 20(1बी) का भी उल्लेख किया। इसके मुताबिक, कोई सांसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य अपने कार्यकाल के दौरान केवल अपने कर्तव्यों के सिलसिले में निर्वाचन क्षेत्र से एलॉट रहने के कारण उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना बंद नहीं माना जाएगा, जहां चुनाव के वक्त वह वोटर के रूप में रजिस्टर्ड था। वहीं, धारा 20(4) के तहत राष्ट्रपति द्वारा चुनाव आयोग से परामर्श के बाद कुछ पदों को इस प्रावधान के दायरे में घोषित किया गया है।

कई संवैधानिक और सरकारी पद शामिल
18 अप्रैल 1960 की अधिसूचना के तहत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यों के राज्यपाल, कैबिनेट मंत्री, राज्यसभा और विधानसभा के कुछ पीठासीन पदों के साथ-साथ केंद्र या राज्य के मंत्री, उपमंत्री और संसदीय सचिव जैसे पद इस प्रावधान में शामिल किए गए हैं। इसमें लोकसभा और विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति और उपसभापति भी शामिल हैं।

ड्राफ्ट रोल में दस्तावेजों की जांच का मौका
वीआईपी नामों को लेकर आयोग ने कहा कि इन प्रावधानों का मकसद ऐसे पदों पर रहने वाले लोगों के वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट रखना है। ड्राफ्ट रोल के दौरान ऐसे नामों पर जरूरी दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया भी पूरी की जा सकती है।

1
Default choosing

Did you like our plugin?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें