राजस्थान में वायु प्रदूषण नियंत्रण की नई पहल, IIT बॉम्बे ने PAVITRA पर आयोजित की कार्यशाला

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जयपुर
 राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की ओर से PAVITRA  भारत के लिए वायु प्रदूषण प्रबंधन एवं हस्तक्षेप उपकरण विषय पर शुक्रवार को कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, उत्सर्जन का आकलन तथा प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न उपायों के संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक एवं आंकड़ा आधारित विश्लेषण करने के संबंध में अधिकारियों को तकनीकी जानकारी दी गई।

इस अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंडल द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के किए जा रहे विभिन्न उपायों की जानकारी दी। इस अवसर पर आरएसपीसीबी के।अधिकारियों ने कार्यशाला में PAVITRA की कार्यप्रणाली, आंकड़ा विश्लेषण एवं इसके व्यावहारिक उपयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की

 PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA एक निर्णय-सहायक मंच है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में प्रस्तावित नीतिगत एवं नियंत्रण उपायों के आधार पर उत्सर्जन में संभावित कमी तथा उसके परिणामस्वरूप वायु में सूक्ष्म कण पीएम-2.5 की सांद्रता में होने वाले बदलाव का आकलन किया जा सकता है। इससे वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।

प्रस्तुति के दौरान विशेषीकृत बहु-प्रदूषक उत्सर्जन सूची—स्मॉग इंडिया— वायुमंडलीय परिवहन एवं रसायन विज्ञान आधारित मॉडल इनमैप-पवित्रा तथा आईएसआरएम-पवित्रा सहित PAVITRA के विभिन्न तकनीकी घटकों की जानकारी दी गई। बताया गया कि स्मॉग इंडिया के माध्यम से देशभर में विभिन्न प्रदूषकों के उत्सर्जन का विस्तृत आंकड़ा आधारित भौगोलिक विवरण उपलब्ध होता है, जिसे PAVITRA के माध्यम से वायुमंडलीय मॉडलिंग से जोड़कर विभिन्न हस्तक्षेपों के संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकता है।

कार्यशाला में PAVITRA डैशबोर्ड का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया गया। इसके माध्यम से अधिकारियों को यह समझाया गया कि किसी क्षेत्र में परिवहन, उद्योग, कृषि अवशेष जलाने, ईंधन में बदलाव तथा अन्य स्रोतों से संबंधित नियंत्रण उपायों को लागू करने की स्थिति में उत्सर्जन और पीएम-2.5 के स्तर में संभावित परिवर्तन का किस प्रकार आकलन किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि PAVITRA का उपयोग आधारभूत आकलन, कार्ययोजना के लिए प्राथमिकता निर्धारण, विभिन्न संभावित परिस्थितियों के आधार पर योजना निर्माण तथा क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग के लिए किया जा सकता है। इसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों एवं प्रदूषण स्रोतों के प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन कर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों की प्राथमिकता निर्धारित करने में सहायता मिल सकती है।

कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन में कमी लाने के संभावित उपायों पर भी चर्चा की गई। इनमें घरेलू क्षेत्र में एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना, घरों का विद्युतीकरण, कृषि अवशेष जलाने में कमी तथा लघु एवं मध्यम उद्योगों में स्वच्छ ईंधन एवं तकनीक को अपनाना प्रमुख हैं। इन उपायों से संबंधित आंकड़ों के आधार पर उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किए जाने की प्रक्रिया भी समझाई गई।

कार्यशाला में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक आंकड़ों और वायुमंडलीय मॉडलिंग का उपयोग कर वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजनाओं को अधिक प्रभावी, लक्षित एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। PAVITRA जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म् से नीति निर्माण एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी को व्यवहारिक निर्णयों से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

गौरतलब है कि, कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों में वैज्ञानिक आंकड़ों, तकनीकी मॉडलिंग एवं आधुनिक निर्णय-सहायक प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देना रहा।

इस अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे की PAVITRA परियोजना टीम द्वारा प्रशिक्षण एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। ऑनसाइट प्रशिक्षण दल में PAVITRA परियोजना के प्रधान अन्वेषक प्रो. चंद्र वेंकटरामन, परियोजना प्रबंधक प्रिया अभिजीत चौधरी, शोध सहयोगी रुतुजा घाटे, शोध वैज्ञानिक डॉ. रोहित सिंह तथा शोध सहयोगी तेजस सरनाइक उपस्थित रहे। वहीं ऑनलाइन माध्यम से PAVITRA परियोजना की सह-प्रधान अन्वेषक प्रो. श्रीनिधि बालासुब्रमणियन एवं पीएचडी शोधार्थी गिरिवेंद्र प्रताप यादव ने प्रशिक्षण एवं तकनीकी सत्रों में सहभागिता की।

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