पठानकोट
पंजाब को नशामुक्त बनाने और राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के मकसद से भारतीय जनता पार्टी आज एक विशाल जन-अभियान की शुरुआत करने जा रही है। पार्टी की ओर से नशा मुक्त पंजाब यात्रा का शंखनाद आज पठानकोट के सीमावर्ती इलाके माधोपुर स्थित एकता स्थल से हो रहा है। इस राज्यव्यापी यात्रा को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
माधोपुर में आयोजित होने वाली विशाल रैली और यात्रा के औपचारिक शुभारंभ से ठीक पहले एक बेहद संवेदनशील कार्यक्रम रखा गया है। मुख्य पंडाल के पीछे बनाए गए विशेष ग्रीन रूम में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन नशे की गर्त में धकेले गए 50 पीड़ित परिवारों से सीधे मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह पीड़ितों का दर्द सुनेंगे और उन्हें नशे के खिलाफ इस जंग में हर संभव मदद का भरोसा दिलाएंगे।
13 दिन, 4000 किलोमीटर और 117 विधानसभा क्षेत्र
यह पूरी यात्रा 18 सितंबर से 30 सितंबर तक कुल 13 दिनों तक निरंतर चलेगी। इस दौरान प्रदेश भर में चार अलग-अलग यात्राएं निकाली जाएंगी, जो राज्य के सभी 117 विधानसभा हलकों को कवर करेंगी। इस महा-अभियान के तहत करीब 4000 किलोमीटर का सफर तय किया जाएगा। पहली यात्रा के सुचारू संचालन और नेतृत्व के लिए 15 विशेष रथ तैयार किए गए हैं। माधोपुर के एकता स्थल पर आज 10 हजार से अधिक लोगों के जुटने का दावा किया गया है।
चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगी अन्य तीन यात्राएं
पहली यात्रा आज पठानकोट से शुरू होने के बाद, बाकी की तीन यात्राएं 19, 20 और 21 सितंबर को क्रमशः फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का और तलवंडी साबो से रवाना होंगी। फाजिल्का से निकलने वाली तीसरी यात्रा को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल हरी झंडी दिखाएंगे। इन सभी यात्राओं का भव्य समापन 30 सितंबर को जालंधर में होगा।
पठानकोट में रहेगा पहला रात्रि विश्राम
माधोपुर से रवाना होने के बाद यह यात्रा सुजानपुर हलके के पूर्व विधायक दिनेश सिंह बब्बू के निवास स्थान पर चायपान के लिए रुकेगी। इसके बाद शाम छह बजे यात्रा पठानकोट शहर में प्रवेश करेगी। खानपुर चौक, डाकखाना चौक, पटेल चौक और एशिया पैलेस से गुजरते हुए यात्रा शहीद भगत सिंह चौक पहुंचेगी, जहां एक विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा। यात्रा का पहला रात्रि विश्राम पठानकोट में ही निर्धारित किया गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा का यह कदम प्रदेश में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और आम जनता के बीच अपनी पैठ गहरी करने की एक बेहद सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।








