मध्यांचल विद्युत निगम की समीक्षा में खुलासा, 15.65 लाख उपभोक्ताओं ने एक बार भी नहीं भरा बिजली बिल

SHARE:

लखनऊ
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग बिजली बिलों के बकाएदार हैं। मध्यांचल विद्युत निगम के अंतर्गत आने वाले जिलों में तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निगम की सितम्बर 2026 में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि करीब 15.65 लाख उपभोक्ताओं ने बिजली कनेक्शन लेने के बाद से आज तक एक बार भी बिल जमा नहीं किया है। इन बकायेदारों में छह माह से लेकर 10 साल तक पुराने उपभोक्ता शामिल हैं, जिन पर 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का भारी-भरकम बकाया है। अब इनके खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा। कुर्की तक की कार्रवाई की जाएगी।

विभाग की नौ सितम्बर की रिपोर्ट के मुताबिक जानकीपुरम 661, गोमतीनगर 145, अमौसी 8342, लखनऊ सेंट्रल जोन 40, सीतापुर जोन 3,35,962, रायबरेली जोन 1,12,073, अयोध्या जोन 3,66,298, देवीपाटन जोन 3,78,204, बरेली-एक जोन 1,14,749 और बरेली-दो जोन 2,48,726 है। यानि 15,65,200 बकायेदार है। विभाग द्वारा कई बकायेदारों को कुर्की के नोटिस जारी किये जा चुके हैं, फिर भी न तो उनसे वसूली हो सकी है और न ही उनके बिजली कनेक्शन काटे गए हैं।

विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की इस लापरवाही के कारण निगम को अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। एमडी ने सभी संबंधित एक्सईएन और एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे डिफाल्टरों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाकर वसूली की जाए। यदि बकाया राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनके कनेक्शन काटने के साथ-साथ कुर्की की विधिक कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी।

बिजली संकट को लेकर उपभोक्ता परिषद आक्रोशित
वहीं, कोयले की कमी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पहले से तैयारियों में बरती गई लापरवाही बताया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हर साल सितंबर में बारिश और जलभराव जैसी स्थिति होती है। हालांकि, दिक्कत इस बार केवल इसलिए हुई क्योंकि पावर कॉरपोरेशन ने अपनी तैयारियां पूरी नहीं रखी थीं।

उन्होंने कहा कि यूपी में 2000 से 3000 मेगावॉट बिजली की कमी पहले ही बनी हुई थी, लेकिन सोमवार को यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के मुताबिक लंबे समय के लिए बंद हुईं और मशीनों की वजह से यह कमी 5340 मेगावॉट हो गई है। ओबरा-सी की यूनिट-1 व यूनिट-2, मेजा यूनिट-1 और हरदुआगंज की यूनिट-9 से उत्पादन नहीं हो रहा है।

इसके अलावा रोजा यूनिट-2, अनपरा यूनिट-7, घाटमपुर यूनिट-1, हरदुआगंज एक्सटेंशन-2 की यूनिट-1 और जवाहरपुर यूनिट-2 भी बंद है। यह कोयले की उपलब्धता में कमी के बजाय प्रबंधन में की गई चूक का नतीजा है। सितंबर 2025 में प्रदेश ने 30,255 मेगावॉट अधिकतम बिजली आपूर्ति की गई थी, जबकि इस साल सितंबर में आपूर्ति करीब 25,000-26,000 मेगावॉट के आसपास बनी है, जबकि जरूरत 27,000-29,000 मेगावॉट है।

1
Default choosing

Did you like our plugin?

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य

शहर चुनें