नई दिल्ली
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो चुका है. ये खेल 23 जुलाई से ग्लासगो में शुरू हुए थे और 2 अगस्त को समाप्त हुए. सबसे ज्यादा मेडल ऑस्ट्रेलिया के हाथ लगे, जिसने 170 मेडल अपनी झोली में डाले, जबकि इंग्लैंड भी पदकों का शतक लगाने में कामयाब रहा. दूसरी ओर भारत ने पिछले 24 साल में अपना सबसे खराब कॉमनवेल्थ प्रदर्शन किया है. हालांकि मेडल कम आने की एक खास वजह भी है।
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल 39 मेडल जीते. इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज रहे. भारतीय खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा मेडल एथलेटिक्स में जीते, जबकि बॉक्सिंग दूसरे और वेटलिफ्टिंग तीसरे स्थान पर रहा. हालांकि सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल भारतीय बॉक्सरों ने जीते. बॉक्सिंग में खिलाड़ियों ने 7 गोल्ड मेडल जीतकर भारत ने इतिहास रच दिया. फिर भी यह पिछले 24 साल में भारत का सबसे खराब प्रदर्शन आखिर कैसे हुआ?
24 साल में सबसे खराब प्रदर्शन
दरअसल 2002 मैंचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स से ही भारत ने हर बार 50 या उससे अधिक मेडल जीतने का सिलसिला बरकरार रखा था. 2002 मैंचेस्टर (69 मेडल), 2006 मेलबर्न (50 मेडल), 2010 नई दिल्ली (101 मेडल), 2014 ग्लासगो (64 मेडल), 2018 गोल्ड कोस्ट (66 मेडल), 2022 बर्मिंघम (60 मेडल). भारत ने 50 से ज्यादा मेडल जीतने का सिलसिला बरकरार रखा था, लेकिन 2026 ग्लासगो खेलों में सिर्फ 39 मेडल आए।
इस बार क्यों नहीं लगा पदकों का अर्धशतक
दरअसल इस बार मेडलों की संख्या सिर्फ 39 होने के पीछे बहुत बड़ी वजह छिपी है. 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में होने थे, सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन मेजबानी की हामी भरने के करीब 15 महीने बाद यानी 2023 में वहां की सरकार ने कहा कि खेलों के आयोजन की अनुमानित लागत 6-7 बिलियन डॉलर तक पहुंच रही है, जो बहुत ज्यादा थी. इस वजह से विक्टोरिया ने खेलों की मेजबानी से इनकार कर दिया।
करीब एक साल तक 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के पास कोई मेजबान नहीं था, लेकिन साल 2024 में आखिरकार ग्लासगो ने हाथ आगे बढ़ाया. चूंकि ग्लासगो के पास तैयारियों के लिए कम समय था और इन्फ्रास्ट्रक्चर दोबारा से तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था, इसलिए कुश्ती, बैडमिंटन और हॉकी जैसे खेलों को हटा दिया गया. अधिकांश उन खेलों पर मार पड़ी, जिनमें भारत अच्छा करता है।
2022 के खेलों को याद करें तो भारत ने कुश्ती में 12 मेडल, टेबल टेनिस में 7 मेडल, बैडमिंटन में 6 मेडल, वहीं हॉकी में भी 2 मेडल आए थे. अगर खेलों को हटाया नहीं जाता और भारत पिछली बार के प्रदर्शन को दोहराता तो आसानी से 70 पदकों का आंकड़ा पार कर सकता था।








