तेहरान
ईरान में एक बड़े सुन्नी मौलवी की हत्या कर दी गई है. मिर्जावेह प्रांत के गवर्नर ने बताया कि अज्ञात हथियारबंद लोगों ने शहर की अली इब्न अबी तालिब मस्जिद में सुन्नी मौलवी मोहम्मद अनवर रीगी की हत्या कर दी है. उन्होंने इसे आतंकी हमला करार दिया है. मिर्जावेह ईरान के दक्षिण पश्चिमी प्रांत का इलाका है. उन्होंने कहा कि कुछ हथियारबंद आतंकियों ने उसकी हत्या की है।
वे बलूच समुदाय के एक मौलवी थे. ईरान में सुन्नी आबादी वाले क्षेत्रों (खासकर बलूचिस्तान) में वे स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे। उनकी नियुक्तिमिर्जावेह की मस्जिद में इमाम-ए-जुम्मा के रूप में हुई थी. यह नियुक्ति विवादास्पद रही, क्योंकि इससे पहले मौलवी अब्दुल क़हार मीरबलोचज़ही को गिरफ्तार किया गया था और कई स्थानीय लोगों ने इस पर विरोध जताया था।
सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत ईरान के सबसे गरीब प्रांतों में से एक है. जहां ईरान एक शिया बहुल देश है वहीं सिस्तान-बलूचिस्तान में सुन्नी बलूच आबादी बड़ी संख्या में रहती है. यह प्रांत लंबे समय से इस्लामी या जातीय उग्रवादियों और सुरक्षा बलों या तेहरान के समर्थक गुटों के बीच संघर्ष का गवाह रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि जांच चल रही है. उन्होंने यहां के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद सुरक्षा को कमजोर करना और प्रांत में सांप्रदायिक मतभेद भड़काना है।
अमेरिका के साथ जंग में उलझा है ईरान
अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के कई ठिकानों पर बमबारी की है, वहीं ईरान भी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है. बढ़ती तल्खी के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्ध तब तक नहीं रुकेगा, जब तक हमें लड़ाई में मजबूत बढ़त नहीं मिल जाती. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "बातचीत भी तभी होनी चाहिए, जब ईरान ऐसी स्थिति में हो जहां उसे लगे कि हालात उसके पक्ष में हैं।
अराघची ने कहा कि किसी भी युद्ध का अंत दो तरह से होता है. पहला, जब किसी एक पक्ष को सैन्य जीत मिल जाए. दूसरा, जब दोनों पक्ष बातचीत करके समझौते पर पहुंचें. लेकिन बातचीत तभी करनी चाहिए, जब संघर्ष में अपनी स्थिति मजबूत हो. जल्दबाजी में बातचीत करना सही नहीं होगा. इसके साथ ही उन्होंने ईरान की सुरक्षा को भी अहम बताया. उन्होंने कहा कि लोगों की जान और देश के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता. हर फैसला पूरी जानकारी और सही आकलन के बाद ही लिया जाना चाहिए।
मिर्जावेह में मस्जिद के पास अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने उन पर गोलीबारी की. गोली लगने से वे मौके पर ही शहीद हो गए. यह उन पर दूसरा हमला था. दिसंबर 2024 में भी उन पर गोलीबारी हुई थी, लेकिन उस समय वे बच गए थे।
विदेश मंत्री ने बयान देकर जले पर नमक छिड़का
अमेरिका और ईरान की जंग एक बार फिर चरम पर पहुंच चुकी है. ईरानी हमलों में तीसरे अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हो गई है और अब डोनाल्ड ट्रंप बदला लेने के मूड में हैं. अमेरिकी सेना ने लगातार नौवीं रात ईरान पर हमला बोला है. एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि ईरानी हमलों में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की याद में, उन्हें सम्मान देने के लिए हमले किए जा रहे हैं. वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कह दिया है कि सेना का कोई भी काम सुरक्षित नहीं होता. यह सब अपने आप में खतरनाक होता है. इस नाजुक मोड़ पर मार्को रुबियो का यह बयान शहीदों के परिवारों को शायद रास नहीं आए।
ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा है कि अमेरिका के नए हमलों के बाद तबरीज, चाबहार, कोणार्क, बंदर महशहर और बंदर इमाम खुमैनी में विस्फोट की सूचना मिली है।
एक और अमेरिकी सैनिक की मौत
अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन नेकहा कि ईरान के हमलों में अमेरिकी सेना के एक तीसरे सैनिक की मौत हो गई है. युद्ध का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और लड़ाकू विमान भेजने शुरू कर दिए हैं. पेंटागन ने बताया कि शनिवार को उत्तरी इराक में ईरान के एक गिराए गए अटैक ड्रोन को नष्ट करने के दौरान सैनिक की मौत हो गई।
मार्को रुबियो का बयान
जब अमेरिका के विदेश मंत्री से शहीद हुए सैनिकों के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "लेकिन देखिए, हमारी सेना दुनिया भर में, खासकर उस इलाके में लेकिन हर जगह, हर दिन बहुत खतरनाक काम करती है. हमारे यहां ऐसे लोग भी रहे हैं जिनकी ट्रेनिंग के दौरान जान चली गई. सेना जो भी काम करती है, उसमें से कुछ भी सुरक्षित नहीं होता. यह सब अपने आप में खतरनाक होता है…"
अभी भी बातचीत के लिए राजी अमेरिका- रुबियो
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका अभी भी ईरान के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन बातचीत असल होनी चाहिए. रुबियो ने कहा, "हम जवाब देते रहेंगे. अगर बातचीत का रास्ता खुलता है, यानी अगर ईरान के लिए कुछ अच्छा करने वाले लोग जीतते हैं और सिस्टम या बातचीत की कमान संभालते हैं, तो यह बहुत अच्छी बात होगी… लेकिन अफसोस की बात है कि अभी हालात ऐसे नहीं हैं।








